रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर मल्टी स्टोरी इमारतें खड़ी किए जाने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इस मामले में प्रतिवादी बनाते हुए पूरे प्रकरण की समग्र जांच का आदेश दिया। ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र और नक्शा पास करने वालों जांच हाई कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान उन अधिकारियों की भूमिका तय की जाएगी, जिन्होंने अवैध निर्माण के लिए किराया रसीद या ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र जारी किए, अवैध इमारतों के भवन नक्शों को मंजूरी दी तथा जिनकी संस्तुति पर बैंकों ने सरकारी जमीन पर ऋण स्वीकृत किया। सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले में 18 फरवरी को अगली सुनवाई होगी, जब एसीबी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।


