रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण यहां मरीजों का सबसे ज्यादा दबाव है। स्थिति यह है कि यहां इमरजेंसी में मरीजों की लंबी वेटिंग है। किसी तरह मरीज भर्ती तो हो जाते हैं, लेकिन बेहद गंभीर मरीजों को भी तत्काल बेड नसीब नहीं हो पाता। कारण है कि यहां एक-एक बेड पर मरीज 24 से लेकर 72 घंटे से अधिक समय तक इलाजरत रहते हैं। दूसरे गंभीर मरीज बेड खाली होने की आस में स्ट्रेचर पर पड़े रहते हैं या किसी निजी अस्पताल में चले जाते हैं। शिफ्ट नहीं किए जाने के कारण मरीज 72 घंटे या उससे ज्यादा समय तक इमरजेंसी में ही पड़े रहते हैं। इस दौरान यदि किसी गंभीर मरीज की सांसें थम रही हैं, वेंटिलेटर की जरूरत है तो भी जबतक बेड खाली नहीं होगा, तब तक उसे इंतजार करना होगा। इमरजेंसी में बेड की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव कई बार आया। स्थिति को देखते हुए कुल 100 बेड में इमरजेंसी की व्यवस्था शुरू करने की योजना बनी। तब ग्राउंड फ्लोर में केवल 40 बेड फंक्शनल थे। इसके बाद पहले तल्ले में 20 बेड बढ़ाकर संख्या 60 की गई। लेकिन शेष 40 बेड अबतक नहीं बढ़ाए जा सके हैं। करीब 20 दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने रिम्स के निरीक्षण के क्रम में फर्स्ट फ्लोर के बंद पड़े ऑपरेशन थिएटर को वार्ड में बदल कर इमरजेंसी बेड बढ़ाने को कहा था। लेकिन अब भी स्थिति वैसी ही है। स्थिति तस्वीरों में देखिए! इमरजेंसी में बेड खाली नहीं, 24 घंटे से स्ट्रेचर पर मरीज
मरीज सिंगराय मुर्मू, 18 घंटे के बाद डॉक्टर ने देखा और स्लाइन चढ़ाई, पर नहीं मिला बेड
मरीज सिंगराय मुर्मू महज 27 साल का है। पोटका विधानसभा क्षेत्र के दिभूडीह गांव का रहने वाला है। िसंगराय मुर्मू को सांस लेने में दिक्कत है। पिता ठुकीर मुर्मू ने कहा कि ऑक्सीजन लेवल 80 से 85 के बीच रह रहा है। वह बार-बार सेंसलेस हो जा रहा है। रिम्स लाए हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गए। इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर पड़ा है। 18 घंटे के बाद डॉक्टर ने देखा और स्लाइन चढ़ाई है। इमरजेंसी में मेडिसिन के सबसे अधिक मरीज
ग्राउंड फ्लोर पर सेंट्रल इमरजेंसी में करीब 40 बेड हैं। यहां अधिकतर मरीज 24 से 72 घंटे से इलाजरत हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन विभाग के हैं। बुधवार को भर्ती करीब 40 मरीज में से 16 ऐसे मिले, जो 48 से 72 घंटे से अधिक समय से इमरजेंसी में हैं। इनमें 80% मरीज मेडिसिन और शेष सर्जरी, न्यूरोसर्जरी विभाग के हैं। एक मरीज को सुपस्पेशियलिटी आईसीयू में 68 घंटे के बाद शिफ्ट किया गया। क्या है नियम… स्थिर मरीजों को शिप्ट करना है
प्रशासन से यह स्पष्ट आदेश है कि सभी स्थिर मरीजों को 72 घंटे के भीतर संबंधित विभाग के आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। जिससे अन्य मरीजों को इमरजेंसी में बेड मिले। मरीज हीरामणि देवी, पेट फूलने की समस्या है, सूजन बढ़ रहा है, पर स्ट्रेचर पर ही इलाज
52 वर्षीय मरीज हीरामणि देवी पिछले 19 घंटे से स्ट्रेचर पर है। मरीज के पेट में पानी जमा हुआ है। पेट फूलने की समस्या के बाद रिम्स लाया गया था। इमरजेंसी में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने कुछ जांच कराई। जिससे पता चला कि पेट में पानी भरा हुआ है, इसलिए सूजन बढ़ रहा है। 19 घंटे बाद भी स्ट्रेचर पर ही इलाज किया जा रहा है, क्योंकि बेड खाली नहीं है। सीधी बात : डॉ. राजीव रंजन, जनसंपर्क अधिकारी, रिम्स
ऑपरेशन थियेटर में इमरजेंसी वार्ड नहीं बन सकता
इमरजेंसी में नए मरीजों को समय पर बेड क्यों नहीं मिल रहा ?
– अस्थिर मरीजों को कभी-कभी शिफ्ट करना उपयुक्त नहीं होता। चूंकि बेड उपलब्ध नहीं थे, इसलिए ऑन्कोलॉजी विभाग की चौथे तल्ले पर मरीजों के लिए अतिरिक्त 70 बेड लगा रहे।
मंत्री ने बेड बढ़ाने को कहा था, अब तक क्यों नहीं बढ़ाया गया?
– स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद इंजीनियरों की एक टीम ने ऑपरेशन थियेटर क्षेत्र का निरीक्षण किया और इसे वार्ड में परिवर्तित करने में असमर्थता जताई।
मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए क्या निर्देश है?
– सभी संबंधित विभागाध्यक्षों को स्पष्ट आदेश है कि अगर मरीज स्थिर हैं तो उन्हें संबंधित विभाग में शिफ्ट किया जाए या आवश्यकता अनुसार संबंधित आईसीयू में भेजा जाए।


