रिम्स में गुरुवार देर रात बड़ी घटना हो गई। रिम्स में संचालित एक कैंटीन से मंगाकर चाय पीना महिला डॉक्टर को भारी पड़ गया। चाय पीने के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी, आनन-फानन में उसे इमरजेंसी में ले जाया गया। लेकिन स्थिति गंभीर देखते हुए उसे क्रिटिकल केयर आईसीयू में शिफ्ट कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर डाल दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। चिकित्सकों ने अगले 48 घंटे उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताए हैं। पीड़ित डॉक्टर गाइनी विभाग की फर्स्ट ईयर पीजी की छात्रा डॉ. अरुणा हैं। गुरुवार को उसकी नाइट ड्यूटी थी। ड्यूटी में ही उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर कैंटीन से चाय मंगवाई थी। चाय लाने के बाद उसे डॉक्टरों ने थरमस में रखा। फिर डॉ. अरुणा ने जैसे ही ग्लास में निकाल कर चाय पी, उसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रबंधन को उनके दोस्तों ने बताया कि चाय पीने के बाद डॉ. अरुणा ने टेस्ट खराब होने, केरोसिन की गंध आने की बात कही थी। प्रबंधन ने मामले को बताया पॉइजनिंग से जुड़ा, जांच समिति गठित रिम्स प्रबंधन ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा ने ऑर्थो विभाग के समीप स्थित कैंटीन से मंगाई गई चाय का सेवन किया था। चाय का स्वाद और गंध असामान्य था। सेवन के कुछ समय बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। चिकित्सकीय दृष्टिकोण से यह मामला पॉइजनिंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। इधर, घटना की गंभीरता को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने औषधि विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। दोनों कैंटीन को निरीक्षण के बाद किया गया सील इस घटना के बाद रिम्स प्रबंधन ने संस्थान में संचालित दोनों कैंटीन का निरीक्षण किया। ऑर्थोपेडिक वार्ड के आगे स्थित कैंटीन में साफ-सफाई की घोर कमी देखने को मिली। प्रबंधन ने ऑर्थो कैंटीन के साथ पेइंग वार्ड स्थित कैंटीन को भी सील कर दिया है। साथ ही कैंटीन संचालक अन्नपूर्णा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और रात में कार्यरत कर्मियों से पुलिस पूछताछ कर रही है। देर शाम पहुंची फूड सेफ्टी टीम, लिया सैंपल : इधर, रिम्स प्रबंधन द्वारा फूड सेफ्टी ऑफिसर को पत्राचार कर कैंटीन के सैंपल की जांच का अनुरोध किया गया। जिसके बाद शुक्रवार देर शाम फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने रिम्स पहुंच कर दोनों कैंटीन से सभी तरह के खाद्य पदार्थ के सैंपल लिये। इसमें पैक्ड फूड, ब्रेड, दूध, दही, चाय, मसाले आदि शामिल हैं। अब इन सैंपलों की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ठीक है या नहीं।


