रिम्स में इलाज के दौरान जिन मरीजों की मौत हो जाती है, उनके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए और जिन बच्चों का जन्म रिम्स में होता है, उनके अभिभावकों को जन्म प्रमाण पत्र के लिए अब बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब तक आवेदन, स्थिति की जानकारी और अंततः प्रमाण पत्र प्राप्त करने में 15 से 30 दिन तक का समय लग जाता था, जिससे खासकर दूर-दराज से आए लोगों को भारी परेशानी होती थी। रिम्स प्रबंधन ने अब व्यवस्था में सुधार करते हुए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन के बाद कुछ ही घंटों के भीतर उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसके तहत आवेदन देने के बाद अधिकतम दो से तीन घंटे में प्रमाण पत्र परिजनों को सौंप दिया जाएगा। प्रबंधन ने जानकारी दी है कि यदि किसी मरीज की मौत रात में रिम्स में होती है तो उस स्थिति में प्रमाण पत्र अगली सुबह उपलब्ध कराया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि यह पहल मृतक-नवजात व उनके परिवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि उन्हें अनावश्यक दौड़भाग से बचाया जा सके। रिम्स प्रशासन आगे इस योजना को और बेहतर बनाना चाहता है। प्रबंधन की तैयारी है कि आने वाले समय में अप्लाई करने के बाद हाथों-हाथ जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाए। इसके लिए सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। दूर-दराज के लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा इस पहल से सबसे ज्यादा लाभ उन लोगों को मिलेगा, जो झारखंड के दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए रिम्स आते हैं। पहले उन्हें कई दिनों तक रांची में रुकना पड़ता था या बार-बार आना-जाना करना पड़ता था। अब 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र मिलने से समय, पैसे और मानसिक तनाव तीनों की बचत होगी।


