हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में छोटूराम नगर रेलवे ट्रैक पर सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के दौरान ट्रेन की चपेट में आए दोनों युवकों की पहचान हो गई है। दोनों आपस में गहरे दोस्त थे और मूलरूप से मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के गांव इटायली के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान 19 वर्षीय शिवम तिवारी और 18 वर्षीय घनेंद्र के रूप में हुई है। परिवार में इकलौते कमाने वाले थे दोनों एमआईई की अलग-अलग फैक्ट्रियों में हेल्पर का काम करते थे और अपने-अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। शिवम दो भाइयों में बड़ा था, उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। वह अपनी मां और छोटे भाई के साथ छोटूराम नगर में रहता था। घनेंद्र की 5 बड़ी बहनें और 1 छोटा भाई है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी वही उठा रहा था। सोशल मीडिया पर एक्टिव थे दोनों दोनों दोस्त सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थे। दोनों अक्सर रेलवे लाइनों पर बैठकर रील बनाते थे। घटना से दो दिन पहले भी छोटूराम नगर में उन्होंने एक संयुक्त रील बनाई थी। के जीना सै तेरे बिना, तू जान हमारी सै हरियाणवी गाने पर यह रील दोनों ने अपने-अपने इंस्टा अकाउंट पर शेयर कर रखी है। पहले भी अक्सर रील बनाते थे दोनों नवंबर माह की 10 व 11 तारीख को शिवम ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर रील बनाई थी। उन्हें क्या पता था कि एक दिन इसी ट्रैक पर रील्स बनाते समय उनकी ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो जाएगी। घनेंद्र भी अक्सर रेल लाइनों पर रील बनाता था। शिवम का इंस्टाग्राम अकाउंट Shivam_star_6608 जिसके 317 फॉलोअर्स हैं और घनेंद्र का अकाउंट आकाश रजाक के नाम से हैं, जिसके 388 फॉलोअर्स हैं। कूड़ा बीनने वाले ने रोका था हादसा गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे हुआ। दोनों युवक रेलवे पटरी पर रील बना रहे थे। वहां मौजूद एक कूड़ा बीनने वाले व्यक्ति ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वे नहीं माने। पहली तरफ से आती ट्रेन देखकर दोनों हट गए, लेकिन दिल्ली की ओर से आ रही दूसरी तेज रफ्तार ट्रेन दिखाई नहीं दी और दोनों उसकी चपेट में आ गए। हादसा कूड़ा बीनने वाले के सामने ही हुआ, जिसने तुरंत स्टेशन मास्टर को सूचना दी। GRP मौके पर पहुंची और शवों को सिविल अस्पताल भेजा गया। पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार में मातम शुक्रवार को परिजनों के बहादुरगढ़ पहुंचने के बाद दोनों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया। शिवम की पहचान आधार कार्ड मिलने से देर शाम हो गई थी। दोनों परिवारों में मातम का माहौल है, क्योंकि घर की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं दोनों युवकों पर थी। रेलवे ट्रैक पर रील बनाना कितना खतरनाक है, यह हादसा एक बार फिर सबक दे गया। शिवम के मामा भानू पटेरिया ने बताया कि शिवम परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसका छोटा भाई और मां भी छोटूराम नगर में साथ ही रहती थी। वहीं घनेंद्र के जीजा नरेश ने बताया कि घनेंद्र की पांच बहने बड़ी हैं और एक छोटा भाई। उनके पिता गांव में खेतीबाड़ी करते हैं, लेकिन घनेंद्र परिवार में इकलौता कमाने वाला था।


