रीवा के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2 में पदस्थ कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में रावत जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘दलाल’ बताते हुए, उन पर पैसे लेकर भ्रष्टाचार की फाइलें दबाने के आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रसारित किया, इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। सीईओ ने मांगा जवाब इस मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कार्यपालन यंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पत्र जारी कर कहा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी फाइल दबाने में लिप्त है तो उनके नाम के साथ जवाब पेश करें, अन्यथा माना जाएगा कि कार्यपालन यंत्री ने बिना प्रमाण के आरोप लगाकर कार्यालय की छवि खराब की है। सीईओ ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत एकतरफा कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए यंत्री स्वयं जिम्मेदार होंगे। कार्यपालन यंत्री ने जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, जो अब समाप्त हो चुका है। अधिवक्ता ने संभागीय कमिश्नर को पत्र लिखा मामले में अधिवक्ता बीके माला ने संभागीय कमिश्नर को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इसके साथ ही ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने लिखा कि कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत का यह बयान कार्यकालीन समय में दिया गया, और इसे सार्वजनिक रूप से मीडिया में प्रसारित किया गया। बयान में उन्होंने कहा कि जिला पंचायत में पैसे लेकर भ्रष्टाचार की फाइलें दबाई जाती हैं, जो प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिवक्ता ने उठाए ये सवाल अधिवक्ता माला ने अपने पत्र में कई बिंदुओं को उठाया: अधिवक्ता माला ने बताया कि वीडियो के सामने आने के बाद न सिर्फ जिला पंचायत रीवा की छवि धूमिल हुई है, बल्कि आम जनता में शासन और प्रशासन को लेकर नकारात्मक धारणा बन रही है। अधिवक्ता ने कमिश्नर को ज्ञापन सौंप मांग की है कि संभागीय कमिश्नर की निगरानी में पूरे मामले की बिंदुवार जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो।


