भास्कर न्यूज | जांजगीर क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश के बाद किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट गए हैं। खेतों में किसानों की हलचल बढ़ गई है। किसान धान की बुआई के साथ खाद और बीज का उठाव कर रहे हैं। जिन किसानों ने पहले ही बुआई कर ली है, उन्हें अंकुरण की समस्या नहीं होगी। सोमवार को दिनभर झड़ी लगी रही। मंगलवार को देर शाम करीब दो से तीन घंटे तक अच्छी बारिश हुई है। 24 जून तक जिले औसत 98 मिमी बारिश हो चुकी है। भू अभिलेख शाखा के अनुसार सबसे ज्यादा जांजगीर तहसील क्षेत्र में बारिश हुई है। अब तक किसान ट्रैक्टर से जुताई कर रहे थे। लेकिन पिछले दो दिन के बारिश के कारण खेतों में नमी अधिक हो गई है। ट्रैक्टर चलाना मुश्किल हो गया है। अब मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। डीएपी नहीं होने पर एनपीके के उपयोग की सलाह: खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों को खाद की किल्लत की समस्या से जूझना पड़ रहा है। धान की बोआई के बीच किसानों को खाद के लिए सोसाइटी से लेकर जिला मुख्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सोसाइटी में डीएपी की कमी हो गई है। ऐसे में कृषि विभाग के अफसर किसानों को डीएपी की जगह एनपीके, सिंगल सुपर फास्फेट और पोटाश का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। बुधवार को बैठक में हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग जांजगीर द्वारा बांध में जल उपलब्धता की जानकारी दी गई। हसदेव बांगो परियोजना अंतर्गत जांजगीर चाम्पा, सक्ती, कोरबा व रायगढ़ जिले के 2,47,400 हेक्टेयर में खरीफ सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बांध में 25.39 प्रतिशत पानी उपलब्ध है, जिस कारण नहर में पानी छोड़ने का तिथि का निर्णय किया जाना संभव नहीं है, अतएव बांध में न्यूनतम 40 प्रतिशत पानी का भराव होने के बाद ही नहर में पानी छोड़ा जाना उचित होगा। कलेक्टर महोबे द्वारा समिति से चर्चा कर बांध में 40 प्रतिशत का भराव होने के बाद ही नहर से पानी छोड़े जाने का निर्णय लिया गया। प्रीत डाहिरे, आरएईओ, कृषि विभाग


