पंजाब के रोपड़ (रूपनगर) सिविल अस्पताल में 11 साल की एक बच्ची की मौत हो गई। बच्ची को पेट में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में दाखिल कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था। बच्ची का इलाज नर्स कर रही थी। बाद में बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने बच्ची की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। रोपड़ के प्रेम नगर असरौ निवासी हाफिज शाहनवाज रिज़वी ने बताया कि बेटी शाहेना (11) को पेट में दर्द हुआ था। तबीयत बिगड़ने पर शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने आरोप है कि जब वो बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां ड्यूटी पर कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। शाहेना का इलाज केवल नर्सों द्वारा शुरू किया गया। बच्ची के पिता शाहनवाज रिज़वी ने कहा कि यदि समय पर डॉक्टर बच्ची को देख लेते, तो उसकी जान बच सकती थी। अस्पताल प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप परिजनों के अनुसार, कुछ देर बाद डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और शाहेना को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों बाद उसकी सांसें तेज होने लगीं और हालत बिगड़ गई। इसके बाद शाहेना ने अस्पताल के बिस्तर पर ही दम तोड़ दिया। परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। बच्ची को इमरजेंसी में चेक किया था: एसएमओ इस मामले पर सिविल अस्पताल के एसएमओ ने बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि बच्ची को इमरजेंसी में देखा गया था और पेट दर्द के लिए उसे दो इंजेक्शन लगाए गए थे। एसएमओ के अनुसार, बच्ची की हालत अचानक गंभीर हो गई और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों का बोर्ड करेगा मामले की जांच एसएमओ ने यह भी कहा कि परिवार से लिखित शिकायत मिलने पर एक बोर्ड का गठन किया जाएगा और सीसीटीवी फुटेज सहित मामले की गहन जांच करवाई जाएगी। इसमें अगर किसी की लापरवाही सामने आई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।


