भोपाल में कई इलाकों में जमीन का पानी (ग्राउंड वॉटर) पीने लायक नहीं है। यह खुलासा नगर निगम द्वारा शहर के चार इलाकों में लिए गए ग्राउंड वॉटर सैंपल की जांच रिपोर्ट में हुआ है। इसके मुताबिक ईदगाह हिल्स, आदमपुर और खानूगांव इलाके में जमीन का पानी पीने लायक नहीं है। इसमें मरे हुए जानवर या मल का अंश (ई कोलाई बैक्टीरिया) मिल रहा है। यहां जमीनी स्रोतों से आपूर्ति बंद भी कर दी गई है। एक्सपर्ट भी इसे खतरनाक मानते हैं। चार सैंपल फेल होने के बाद उन कॉलोनियों के लोगों में दहशत है, जहां ग्राउंड वॉटर यानी, बोरवेल का पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर में ऐसी 737 कॉलोनियां हैं, जिनमें बोरवेल के पानी का इस्तेमाल हो रहा है। पिछले 8 दिनों से ऐसी कॉलोनियों से रोजाना पानी के कनेक्शन के आवेदन निगम पहुंच रहे हैं, लेकिन तमाम कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां निगम की आपूर्ति लाइन ही नहीं है। दावा झूठा… खानूगांव में जहां ई कोलाई मिला, वहीं से हो रही थी सप्लाई खानू गांव में कुएं के पानी में खतरनाक ई कोलाई बैक्टीरिया मिला। निगम कह रहा था, इससे नहीं की जाती जलापूर्ति दो दिन पहले निगम दावा कर रहा था कि खानूगांव में पानी की सप्लाई ग्राउंड वाटर से नहीं हो रही है, लेकिन गुरुवार को उसने माना कि वहां कुंए से करीब 1500 लोगों को पानी सप्लाई हो रहा था। इस कुएं के पानी में ई कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। इससे हैजा फैलने की आशंका होती है। जांच में सैंपल फेल होने के बाद कुआं बंद कर दिया गया है। अब वहां टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। 394 किलोमीटर का ‘डेथ जोन’: सीवेज-पानी की लाइनें साथ-साथ
भोपाल में पाइपलाइन नेटवर्क का गणित डराने वाला है। शहर में कुल 4,200 किमी पानी की पाइपलाइन है, जबकि 700 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइनें बिछी हैं। इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी चूक यह है कि इसमें से 394 किलोमीटर के इलाके में सीवेज और पानी की पाइपलाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब या साथ-साथ बिछी हैं। लीकेज होते ही सीवेज का गंदा पानी सप्लाई में घुल रहा है और सीधा लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है। राजधानी के तीन हजार नलकूपों के पानी की शुद्धता पर उठे सवाल
निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि भोपाल की 737 कॉलोनियां आज भी पूरी तरह से जमीन के नीचे के पानी (ग्राउंड वॉटर) पर निर्भर हैं। शहर में करीब 3000 निजी नलकूप हैं। अब, जबकि ईदगाह हिल्स, आदमपुर और खानूगांव के सैंपल फेल हो चुके हैं, इन 3 हजार नलकूपों की शुद्धता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। इसके अलावा निगम भी 191 नलकूप से पानी सप्लाई करता है। पहले 235 थे। इनमें से 44 बंद हो चुके हैं। इसमें बाजपेयी मल्टी का भी नलकूप है। 1500 सैंपल की जांच हो चुकी, 300 की जांच हो रही… निगम अब तक शहर भर से 1,500 से ज्यादा सैंपल ले चुका है। इनमें से 300 की रिपोर्ट नहीं आई है। एक सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में 24 से 36 घंटे लगते हैं। हर नगर निगम हर दिन करीब 400 सैंपल की जांच कर रहा है। इंदौर में जिन बैक्टीरिया ने तबाही मचाई भोपाल में उनकी जांच नहीं… 1500 से ज्यादा टेस्ट, सिर्फ कॉलीफार्म जांचा
निगम 31 दिसंबर से रोजाना पानी के सैंपलों की जांच करा रहा है। नौ दिन में 1500 से ज्यादा सैंपल जांचे, लेकिन स्टैंडर्ड प्रोसीजर के नाम पर सिर्फ टोटल कॉलीफार्म की ही जांच हो रही है। इंदौर के भागीरथपुरा में जिस ई कोलाई, स्यूडोमोनास एरूजिनोसा, सिट्रोबेक्टर, क्लेबसेला और बिब्रियो बैक्टीरिया ने तबाही मचाई, उसकी जांच नहीं हो रही। लक्षण दिखेंगे तो टेस्ट करा लेंगे: कमिश्नर
भागीरथपुरा वाले घातक बैक्टीरिया की जांच न कराने के सवाल पर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन का तर्क भी चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि जांच स्टैंडर्ड प्रोसीजर के अनुसार हो रही है। जब किसी इलाके में ऐसे लक्षण दिखेंगे, तो ये जांचें भी करवा लेंगे। यानी, वे बीमारी फैलने का इंतजार कर रही हैं। क्या भोपाल के भागीरथपुरा बनने का इंतजार
ई कोलाई के साथ स्यूडोमोनास एरूजिनोसा, सिट्रोबेक्टर, क्लेबसेला और बिब्रियो बैक्टीरिया से इंदौर में हालात बेकाबू हुए। 20 लोगों की मौत हुई। इन वायरस से पेट, लिवर, किडनी डैमेज और हैजा फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद भी भोपाल में इसकी जांच नहीं कराई जा रही है। क्या अफसर भोपाल के भागीरथपुरा बनने का इंतजार कर रहे हैं? रिपोर्ट कार्ड: लीकेज और सुधार का दावा जिनकी जांच नही, वह कितने खतरनाक जहां के सैंपल फेल हुए हैं, वहां निगम टैंकर से पानी सप्लाई कर रहा है। बाजपेयी नगर मल्टी में पहले से नलकूप बंद हैं। वहां कोलार पाइप लाइन से पानी सप्लाई होता है। स्टैंडर्ड प्रोसीजर के अनुसार ही पानी की जांच की जाती है। इसमें मुख्य टोटल कॉलीफर्म की जांच अहम होती है। उसके रिजल्ट के अनुसार ही आगे के स्टेप लिए जाते हैं। -संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम


