उदयपुर में अखिल भारतीय नागरिक परिसंघ के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। वरिष्ठ नागरिकों के हितों को लेकर 16 सूत्रीय मांगों का रेजोल्यूशन पास किया गया। सबसे बड़ी मांग यह थी कि कोरोना के समय रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बंद किया गया रेलवे कंसेशन को पुन: शुरू किया जाए। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय सभागार में हुए महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान, उदयपुर के साझे में हुए दो दिवसीय सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। परिसंघ के अध्यक्ष वी के भदाने, उपाध्यक्ष भंवर सेठ ,मदन खटोड़, डी एन चापके, टीपीआर उन्नी, एमके रैना, डा सुलभा देवीदास, पी विश्वनाथम, नंदलाल अग्रवाल, दामोदर मुदाफरे ने वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित विषयों पर अपने विचार रखें। आखिरी दिन सर्वसम्मति से 16 सूत्रीय एक मांग-पत्र तैयार किया गया, जिसे उपस्थित 1500 ही सदस्यों ने एकमत से समर्थन किया। संस्थान के मानद सचिव भंवर सेठ ने बताया कि मांग पत्र में सर्वप्रथम वरिष्ठ नागरिकों की ओर से सुझाए गए प्रस्तावों को पास किया गया। सम्मेलन के प्रथम सत्र में सुषमा सिंघवी ने कहा- हम वरिष्ठ है वरिष्ठ बनकर ही रहें। निज ज्ञान कौशल कला क्षमता को बात कर सक्रिय रहे। सेवा करने में आंतरिक सुख का अनुभव होता है। डॉ.गायत्री तिवाडी ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज है। महिलाएं अपने बारे में में भी सोचे। आर्ट एवं कल्चर कमेटी की चेयरपर्सन ने भी अपने विचार रखें। कार्यक्रम की मध्यस्थता डा सुलभा कंवर ने की एवं संचालन यमला साहू ने किया। दूसरे सत्र में वरिष्ठ नागरिकों को विधिक एवं न्यायिक अधिकारों पर डॉ. कल्पेश के निकावत के संचालन में एम के रैना,पी रामचंद्रेया, एस हनीफा रावथर, भगवंत कौर ने अपने विचार रखें। मुख्य वक्ता के रूप में जिला न्यायाधीश वाणिज्यिक न्यायालय महेंद्र कुमार दवे ने कहा- मेंटेनेंस की परिभाषा में सुरक्षा का अधिकार जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने भरण पोषण की जानकारी प्रदान की। खुले सत्र में वी के भदाने, नारायण मूर्ति, अन्ना साहिब टेकाले, संग्राम श्रीधर के सानिध्य में करनैल सिंह, विजय देशमुख दंबडगांवकर, डॉ. मिलिंद सरदार,डा प्रदीप कुमार सिन्हा, मालती जायसवाल, महेंद्र कुमार गुप्ता, के के बिडला, सुरेश गवास, जी पी शेख, अशोक तेरकर, डॉ. इंदु सुभाष आदि ने विचार रखे। सम्मेलन में पास किए रिजोल्यूशन की मुख्य बातें


