भास्कर न्यूज | राजसमंद तीन माह भरपूर बरसकर मानसून तो विदा हो चुका है, लेकिन बारिश का दौर अब भी जारी है। मौसम विभाग ने आगामी एक या दो दिनों तक बारिश होने के चेतावनी जारी कर रखी है। इसके बाद एक नया सिस्टम एक्टिव हो सकता है। शुक्रवार रात को जिलेभर में झमाझम बारिश का दौर शुरू कर दिया। दिनभर उमस और धूप के बाद शाम को बादल छा गए और देर रात तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही। सबसे ज्यादा बारिश रेलमगरा में दर्ज की गई, जहां पौने चार इंच पानी गिरा। वहीं नाथद्वारा में साढ़े तीन इंच से अधिक, राजसमंद में डेढ़ इंच, कुंवारिया में एक इंच से अधिक, कुंभलगढ़ में 15 एमएम, देलवाड़ा में 18 एमएम, गढ़बोर में 21 एमएम, गिलूंड में 9 एमएम, देवगढ़ में 12 एमएम, आमेट में 2 एमएम तथा भीम क्षेत्र में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। शनिवार दिन में भी कुछ जगह हल्की बरसात का क्रम जारी रहा। इन दिनों खरीफ फसलों की कटाई का दौर शुरू हो चुका है। कई किसानों ने धान, सोयाबीन, मक्का आदि फसलें काटकर खेतों में रखी हुई थीं। रात की बारिश से इन फसलों पर पानी पड़ गया। जिससे फसलें भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। राजसमंद कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेलमगरा क्षेत्र में 50 प्रतिशत कटाई हो चुकी है। जबकि राजसमंद ब्लॉक में 20 प्रतिशत ही कटाई हुई। जिन किसानों ने कटाई करके फसल को खेतों में ही पड़ी रखी है। उन किसानों के अनाज के दाने की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। मोही| कस्बे में शुक्रवार रात करीब 8 बजे से साढ़े नौ बजे तक मूसलाधार बारिश होने से खेत जलमग्न हो गए। सड़कों पर पानी तेज बहने लग गया। कस्बे के एनिकट पर एक फीट की चादर चल रही। तेज बारिश से मोही, राज्यावास, पीपली आचार्यान वाला मार्ग बंद हो गया। पानी के तेज बहाव में एक बाइक सवार बह गया। जिसे ग्रामीणों ने बाइक सवार को बचा लिया, लेकिन उसकी बाइक बहकर चली गई। शनिवार को सुबह बाइक को बाहर निकली गया। वहीं बोलोरो गाड़ी भी पानी में फंस गई। क्रेन की सहायता से बाहर निकाला गया। ^अक्टूबर माह की बरसात खरीफ फसलों जैसे धान, सोयाबीन, मक्का व कपास को नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि कटाई के समय दाने अंकुरित हो जाते हैं, सड़न और फफूंद रोग बढ़ जाते हैं तथा गुणवत्ता घटती है। जिन किसानों की फसलें कटकर खेतों में रखी हैं, उन्हें तुरंत पलटकर सुखाने की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि नमी कम हो सके। नमी बनी रहने से दाने अंकुरित हो सकते हैं या फसल में फफूंद लगने की आशंका बढ़ जाती है। जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां जल्द से जल्द निकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे खेतों में जलभराव और नमी से बचाव के लिए नालियां बनाएं और अगली रबी फसल की तैयारी से पहले भूमि को पूरी तरह सूखने दें। इस तरह के असमय मौसम परिवर्तन से फसल उत्पादन पर 5 से 10 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। -डॉ. रविंद्र वर्मा, सेवानिवृत संयुक्त निदेशक कृषि विभाग उदयपुर।


