सिटी रेलवे स्टेशन की कॉलोनी में क्वार्टरों की रंगाई कराई जा रही है, जबकि अंदर से क्वार्टरों की हालत नाजुक बनी है। रंगाई-पुताई पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि वही पैसा यदि क्वार्टरों की छतों की वाटरप्रूफिंग और ढांचागत मेंटेनेंस पर खर्च होता, तो कर्मियों को राहत मिलती। लोगों ने कहा कॉलोनी में 350 के करीब क्वार्टर हैं, यहां केवल “बाहरी दिखावा’ किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन केवल उन दीवारों को रंग रहा है, जो जीएम की नजर में आएंगी, जबकि क्वार्टरों की आंतरिक स्थिति नाजुक बनी है। कर्मियों ने आरोप लगाया कि बीते कई सालों से कमरों की छतों और दीवारों की मेंटेनेंस नहीं की गई है। बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता है और सीलन के कारण दीवारों की हालत खस्ता हो चुकी है। कई क्वार्टरों की छतें इतनी जर्जर हैं कि कभी भी हादसा हो सकता है। यहां तक कि क्वार्टरों की सीवेज सिस्टम भी फेल हैं, और मेन सीवर लाइन से पानी का निकासी भी बंद रहती है। इस वजह से मैनहोल ओवर फ्लो होकर गलियों में पानी जमा होता है। रविवार को रेलवे कॉलोनी के क्वार्टर नंबर-176 में रंगाई का काम किया जा रहा था, जबकि अंदर से क्वार्ट की हालत खस्ता बनी थी। वहीं रेलवे कॉलोनी नंबर-3 में अधिकांश क्वार्टरों की हालत जर्जर हो चुकी है। यहां पर क्वार्टर नंबर-246-ए के कर्मी ने कहा िक बारिश में क्वार्टर में पानी टपकता है, और सामान भी खराब हो जाता है। इसकी तरह से दूसरी क्वार्टरों की हालत भी खराब बनी है। इसके लिए मुलाजिमों ने रेलवे प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई है। सरकारी क्वार्टरों पर रंगाई करते कर्मी। क्वार्टरों की मेंटेनेंस के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी सरकारी क्वार्टरों की मेंटेनेंस के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इसके बाद क्वार्टरों की मेंटेनेंस का काम भी कराया जाएगा। -संजीव कुमार, डीआरएम


