रेलवे प्रशासन अजमेर मंडल:उदयपुर में सुखाड़िया सर्किल के पास खुलेगा रेल कोच रेस्टोरेंट

रेलवे प्रशासन अजमेर मंडल के उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और आबू रोड में रेल कोच रेस्टोरेंट खोलने की तैयारी में है। ये रेस्टोरेंट स्क्रैप यानी किसी काम के नहीं रहे रेल कोच को मोडिफाई कर बनाए जाएंगे। उदयपुर में सुखाड़िया सर्किल स्थित रेलवे ट्रेनिंग संस्थान परिसर में यह रेस्टोरेंट होगा। रेलवे की यह जमीन प्राइम लोकेशन की है, जहां हजारों पर्यटकों की आवाजाही भी रहती है। इसके लिए ई-नीलामी के जरिए लाइसेंस जारी किया जाएगा। बोली आईआरईपीएस साइट पर होगी। दरअसल कोई भी कोच 24 साल इस्तेमाल के बाद कंडम घोषित कर दिया जाता है। इन्हें स्क्रैप व्यापारी खरीदते हैं, लेकिन जो कोच अच्छी स्थिति में हैं, उन्हें रेलवे रेस्टोरेंट के लिए देगा। ये थर्ड एसी कोच हैं। इसके अलावा रेलवे अपनी प्राइम लोकेशन वाली छोटी-छोटी जगहों पर फूड ट्रक भी खड़े करेगा। इसके लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। इससे इन जमीनों का उपयोग होने के साथ आमदनी भी होगी। पांच साल के लिए देंगे लाइसेंस, रेनोवेट कर सकेंगे अजमेर मंडल के सीनियर डीसीएम बी.एस. चौधरी ने बताया कि लाइसेंस 5 साल के लिए देंगे। जमीन और रेल कोच रेलवे देगा। लाइसेंसधारक कोच रेस्टोरेंट को अपने हिसाब से रेनोवेट करवा सकेगा। नाम भी खुद की पसंद से रख सकेगा। खाने-पीने की वस्तुओं को फैंसी नाम देने की भी अनुमति होगी। सबकी कंप्यूटरीकृत बिलिंग अनिवार्य होगी। केशलैस लेनदेन की सुविधा भी देनी होगी। शराब बिक्री नहीं होगी। टेंडर आने वाले दिनों में होगा। किसी भी तरह के विज्ञापन की अनुमति नहीं होगी। रेलवे प्रशासन किसी भी समय निरीक्षण करेगा। अनुबंध समाप्त होने पर कोच रेलवे की संपत्ति रहेगा।
रेलवे की जमीन पर फूड ट्रक भी खड़े कर सकेंगे, लीज पर मिलेगी जमीन
रेलवे अपनी प्राइम लोकेशन वाली जगह भी लीज देगा। यहां लोग फूड ट्रक खड़े कर सकेंगे। अजमेर मंडल में इसके लिए अभी उदयपुर और अजमेर लोकेशन चुनी गई है। उदयपुर में जगह के विकल्प देखे जा रहे हैं।
संभावना है कि यह शुरुआत भी सुखाड़िया सर्किल पर रेलवे की जमीन पर ही हो। रेलवे इसके लिए चार्ज लेगा। वेंडर अपने फूड ट्रक के साथ खुली जगह में टेबल-चेयर रख सकेंगे। उन्हें स्थायी संरचना बनाने की अनुमति नहीं होगी। पहले चरण में 4 फूड ट्रक के लिए टेंडर खोलेंगे। प्रयोग सफल रहा तो दूसरे बड़े शहरों में यह व्यवस्था करेंगे। मकसद रेलवे की आय बढ़ाना है। रेलवे की कई प्राइम लोकेशन पर जमीन खाली पड़ी हैं, जो अनुपयोगी है।

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