झालावाड़ पुलिस ने रोडवेज कंडक्टरों को धमकाकर और ब्लैकमेल कर अवैध वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सरगना सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से लग्जरी वाहनों के साथ 11 लाख 57 हजार रुपए नकद, लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह राज्य के कई जिलों में सक्रिय था, जिसके कारण राजस्थान रोडवेज को कुछ स्थानों पर 40 प्रतिशत तक राजस्व का नुकसान हो रहा था। गिरोह के सदस्य कंडक्टरों से रिमार्क लगवाने और रोडवेज उड़नदस्ते की गतिविधियों की जानकारी देने के नाम पर पैसे वसूलते थे। पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन राइड’ के तहत की गई कार्रवाई में आरोपियों के पास से लग्जरी वाहनों के साथ 11 लाख 57 हजार रुपए नकद, लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि गुप्त शिकायतें और टोल फ्री नंबर पर मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में गिरोह द्वारा संगठित तरीके से की जा रही अवैध वसूली और धमकी के पुख्ता सबूत मिले। इनमें यूपीआई लेनदेन, कॉल डिटेल्स, स्पाई कैमरे से बनाए गए वीडियो और कंडक्टरों को व्हाट्सएप के माध्यम से उड़नदस्ते की सूचना उपलब्ध कराना शामिल है। गिरोह के सदस्यों के खिलाफ पूर्व में मारपीट के मामले भी दर्ज हैं। गैंग के खिलाफ पूर्व में कई मामले दर्ज
एसपी ने बताया कि गिरोह के खिलाफ राजकार्य कर रहे रोडवेज बस के कार्मिकों को ब्लैकमेल कर रिमार्क लगवाकर नौकरी से हटवाने की धमकी, राजकार्य में व्यवधान, मारपीट कर दबाव बनाने व मिलीभगत से की घटना पूर्व में की जा चुकी है। इस संबंध में रोडवेज कार्मियों ने प्रकरण भी दर्ज कराए हैं। उड़नदस्तों की सूचना व्हाट्सएप ग्रुपों में साझा की जा रही थी। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हुआ। जिसके संबंध में तत्कालिक यातायात प्रबंधक ने प्रकरण दर्ज करवाया था। वर्ष 2022 में तत्कालिक यातायात प्रबंधक के साथ राजकार्य में बाधा डालने व गंभीर मारपीट कर जातिसुचक शब्दों से अपमानित करने का प्रकरण पुलिस थाना मण्डावर में दर्ज हुआ था जो न्यायालय में विचाराधीन है।
कैसे काम करते हैं सदस्य और एसटीडी क्या है
यह वह लोग होते है जो निगम में परिचालक (कंडक्टरों) के पद पर कार्य करने वाले व्यक्तियों को विजिलेंस टीम की सूचना देकर बिना टिकट यात्रा करवाकर निगम को राजस्व की हानि करवाते हैं। चूंकि यह गिरोह कई वर्षों से सक्रीय है, जब एसटीडी-पीसीओ प्रचलन में थे तब इन्हीं एसटीडी के माध्यम से ही रोडवेज में विजिलेंस टीम की सूचना एक दूसरे को दी जाती थी ताकि कार्रवाई से बचा जा सके। तबसे गिरोह में ऐसे सदस्यों को एसटीडी के नाम से जाना जाता है।
एसटीडी कैसे राजस्व हानि पहुंचाते हैं
विजिलेंस टीम की सूचना के ऐवज में प्रतिदिन प्रति परिचालक एक एसटीडी 50 रुपए से 200 रुपए वसूलता है। राज्य के हर जिले कई एसटीडी सक्रिय हैं। इस प्रकार एक परिचालक का एक दिन का एसटीडी खर्च 1500 से 2000 रुपए होता है। इसकी वसूली परिचालक की ओर से यात्रियों से बिना टिकट यात्रा करवाकर की जाती है, जिससे निगम को राजस्व की हानि होती है।


