रोपड़ में पुल बहने के चलते पैदल राहत-सामग्री लेकर पहुंचे:हरियाणा से आई मदद, 4 किलोमीटर चले; घर और फसलें बर्बाद

रोपड़ में आज यानी शनिवार को हरियाणा से मदद करने पहुंचे लोगों को पैदल गांव जाकर मदद पहुंचानी पड़ी, क्योंकि गांवों को जोड़ने वाला पुल सतलुज के पानी में बह गया था। इससे कारण लोगों को 4 किलोमीटर पैदल चलकर मदद पहुंचानी पड़ी। बरसाती पानी और बीबीएमबी से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है। घटना बेला ध्यानिया गांव की है। नदी के तेज बहाव ने गांव की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। गांव को बाहरी क्षेत्रों से जोड़ने वाला लकड़ी का पुल भी बह गया है। इससे लगभग 40 परिवारों का आसपास के गांवों से संपर्क टूट गया है। तीन-चार दिनों तक प्रभावित परिवारों तक राशन और जरूरी सामान नावों से पहुंचाया गया। इससे पहले एनडीआरएफ की टीमों ने महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों और घरों की रखवाली के लिए गांव में रुके रहे। मक्की और सब्जियों की फसल नष्ट हो चुकी
अब पानी का स्तर कम हो रहा है। लेकिन समस्याएं कम होने की बजाय बढ़ गई हैं। मक्की और सब्जियों की फसल नष्ट हो चुकी है। खेतों में अभी भी पानी भरा है। ग्रामीणों ने लाखों रुपए खर्च कर बनाया पुल पूरी तरह टूट चुका है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से पक्का पुल बनाने की मांग की है। इससे हर साल बरसात में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा। इस बीच हरियाणा के पानीपत से कुछ लोगों ने राहत सामग्री पहुंचाई है। उन्होंने राशन किट के साथ पुल निर्माण के लिए आर्थिक मदद भी दी है। साथ ही सरकार से ग्रामीणों के नुकसान की भरपाई की मांग की है।

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