कोरर वन परिक्षेत्र अंतर्गत कुर्री के झरन तालाब के निकट जंगल में लापता ग्रामीण का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। शरीर के सिर और पैर हैं, लेकिन अन्य हिस्से गायब हैं। जिस स्थिति में शरीर के अंग मिले हैं, उससे आशंका जताई जा रही है कि उसे तेंदुए ने खा लिया होगा। मिली जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत कुल्हाडकट्टा के पारधी पारा निवासी दयाराम कोरेटी(51) एक माह पहले अपनी बेटी दामाद के घर कुर्री गांव गया था। वहां एक माह तक रहने के बाद 1 फरवरी की शाम 5 बजे अपने घर पारधी पारा जाने के लिए निकला था। लेकिन देर रात तक वह अपने पारधी पारा घर नहीं पहुंचा। सुबह जानकारी होने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। दो दिन तक काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। 4 फरवरी को जब ग्रामीण की बेटी गीता नेताम अपने पति के साथ जंगल लकड़ी लेने गई थी, तब उसे वहां उसके पिता का गमछा मिला। इसे देखकर आशंका हुई। आसपास खोजबीन की गई, तो झरन तालाब के निकट पहाड़ी में पिता का सिर मिला। उसने तत्काल इसकी जानकारी सरपंच और ग्रामीणों को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग व पुलिस दोनों मौके पर पहुंच ग्रामीण के सिर को बरामद किया। इसके साथ ही 5 फरवरी गुरुवार को फिर से उसकी आसपास तलाश की गई। इस दौरान जहां सिर मिला था, उससे कुछ दूरी पर ग्रामीण के कमर के नीचे का हिस्सा और दोनों पैर मिले। इसमें किसी जानवर के नोचने के निशान नजर आए। आशंका जताई जा रही है कि पेट का हिस्सा जानवर ने खा लिया होगा। वन परिक्षेत्र अधिकारी कोरर बीएल सुरोजिया ने बताया कि शरीर टुकड़ो में मिला है। पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। रिर्पोट में पता चलेगा कि हमला करने वाला तेंदुआ है या कोई और वन्य प्राणी। पीएम रिपोर्ट के बाद मुआवजा प्रकरण बनाया जाएगा। कुर्री के पहाड़ी में लापता ग्रामीण के शरीर का क्षत-विक्षत अंग बरामद करता वन विभाग। बेटी दामाद का घर कुर्री से पारधी पारा कुल्हाड़कट्टा की दूरी सड़क मार्ग से 12 किमी है। दोनों के बीच गाड़ियां भी चलती हैं, लेकिन ग्रामीण पहाड़ी वाले खतरनाक शॉर्टकट रास्ते को अपनाते हैं। इसकी दूरी 8 किमी है। ग्रामीण भी इसी मार्ग से घर से के लिए रवाना हुआ था। ग्रामीण बांस का सामान बनाकर बेचता था। ऐसे में माना जा रहा है कि वह रास्ते में बांस लेने के चक्कर में जंगल के अंदर चला गया हरोग। जब वह जंगल के अंदर 1 किमी गया, तब झरन तालाब के पास ही उस पर तेंदुआ ने हमला किया होगा। चूंकि मौके पर बांस का कटा हुआ पेड़ पड़ा था और निकट ही खून के धब्बे थे, इससे आशंका है कि ग्रामीण पर यहीं हमला हुआ। अनुमान के मुताबिक, उसकी मौत के बाद तेंदुआ उसे घसीटते हुए 30 मीटर दूर पहाड़ी पर ले गया। डोंगरकट्टा की पहाड़ी में एक साल पहले 18 जनवरी 2025 में भालू ने तीन लोगों पर हमला कर दिया था। इसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। कुछ दिन बाद घायल वन कर्मी नारायण यादव की भी मौत हो गई। मुल्ला-चिचगांव में भी दो साल पहले एक तेंदुआ ने महिला पर हमला कर उसे मार दिया था। मृतक ग्रामीण के दामाद बिसाऊ राम नेताम और सरपंच प्रदीप कोरेटी ने बताया कि कुर्री के आसपास तेंदुए के आमद बनी रहती है। वह मवेशी और मुर्गे आदि पर ही हमला किया करता था। इससे पहले तेंदुए ने किसी ग्रामीण पर हमला नहीं किया। उक्त घटना और तेंदुए के आदमखोर होने से दहशत बढ़ गई है। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।


