लाखों खर्च कर बनाया गया साइकिल ट्रैक बेजार, साइक्लिस्ट और बच्चों को परेशानी

पॉलीटेक्निक कॉलेज के चारों तरफ बनाया गया साइकल ट्रैक इन दिनों पूरी तरह काम का नहीं रह गया है। निर्माण सामग्री और कचरे से अटा यह ट्रैक साइकिल चलाने वालों के लिए खतरे और असुविधा का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों ने ट्रैक की लोहे की रेलिंग तक उखाड़ फेंकी है। करीब दो किलोमीटर की इस गोलाई में डेयरी बूथ लग गए हैं, जिससे ट्रैक की उपयोगिता खत्म हो गई है। ट्रैक तत्कालीन जिला कलेक्टर नमित मेहता के कार्यकाल में बनवाया गया था, लेकिन अब इसका कोई निस्तारण और जवाबदेही नहीं है। बजट और जवाबदेही का सवाल लाखों रुपए खर्च कर बनवाया गया साइकल ट्रैक अब उपयोग के बजाय अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण ट्रैक में रखी सामग्री और अनधिकृत डेयरी बूथ ने इसे पूरी तरह अनुपयोगी बना दिया है। यह सवाल उठता है कि इतनी राशि खर्च करने के बावजूद ट्रैक की निगरानी और सुरक्षा का कोई इंतजाम क्यों नहीं किया गया। स्थानीय लोग और साइकल चालकों ने इसे जल्द ही सुधारने और ट्रैक को उपयोगी बनाने की मांग उठाई है। साइकिलिस्टों का संकट साइकिल चलाने वाले स्थानीय लोग और बच्चे अब इस ट्रैक पर अभ्यास तक नहीं कर पा रहे हैं। ट्रैक पर जमा कचरा, निर्माण सामग्री और अवरोधों के कारण उन्हें साइकिल चलाने में लगातार जोखिम का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति उन शौकीनों और बच्चों के लिए बेहद निराशाजनक है, जो स्वस्थ जीवन और खेल-कूद के लिए इसे इस्तेमाल करना चाहते थे। ट्रैक पर बने डेयरी बूथ ने तो स्थिति और बिगाड़ दी है।

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