लाठ परिवार वंशावली का विमोचन 875 साल का इतिहास संजोया गया

भास्कर न्यूज | टिटिलागढ़ सिंगापुर के हर्ष वर्धन गोयल अध्यक्ष अग्र वंशावली शोध परिषद के कई वर्षों के प्रयास से 450 पृष्ठ की भारत और दुनिया के विभिन्न देशों में बसे लाठ अग्रवाल परिवार की विस्तृत वंशावली का वर्चुअल मोड पर विमोचन किया गया। विभिन्न स्थानों के लाठ परिवार सदस्यों के उपस्थिति में कोलकाता के अरुण लाठ ने पुस्तक का विमोचन किया। इसमें 36 पीढ़ियों का 875 साल का इतिहास संजोया गया है। इस पुस्तक के आकर्षक डिजाइन, पुस्तक की गुणवत्ता, वरिष्ठ लाठ सदस्यों के चित्र, समाज में योगदान और उपलब्धियों को भी संजोया गया है। पुस्तिका का प्रकाशन में बीकानेर वाले तोलाराम लाठ, देवरिया के बद्रीनारायण लाठ, कोलकाता के अरुण लाठ के अथक प्रयास किया। वंशावली में 36 पीढ़ियों का इतिहास संजोया गया है। इसी समय लाठ परिवार का विस्थापन हुआ। लाठ सरनेम अंग्रेजों द्वारा अथवा लठ्ठ रखने से नहीं निकला बल्कि एक स्थान परक है। लाठ परिवार के सदस्यों व विभिन्न तीर्थ स्थान के पड़ों से मिली जानकारी के आधार पर पुस्तक का संकलन किया गया है। पुस्तक के संपादक हर्षवर्धन गोयल ने बताया पूर्वकाल में सभी जन अपनी वंशावली को संजो कर रखते थे, किन्तु कुछ कारणों से यह सनातनी परंपरा जो हम सबको एक सूत्र से जोड़कर रखती थी, इसकी कड़ी टूट गई थी। परिवार छोटे होते जा रहे है और हम संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। व्यस्तता के इस युग में हमने वसुधैव कुटुम्बकम नाम से वंशावली संकलन करने का जटिल कार्य का शुरुआत किया गया। बामडा के ज्योति कुमार लाठ द्वारा लूणी सती दादी के इतिहास पर शोध परक लेख समेत गीलो सती दादी के इतिहास पर भी ज्ञानवर्धक लेख प्रकाशित है। शोधकर्ता व संपादक हर्ष गोयल ने कहा यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर साबित होगी।

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