हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाला अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली हर सूचना, संशोधन और निर्देश पर नियमित नजर रखने के लिए स्वयं जिम्मेदार होता है। इसमें चूक होने पर बाद में कोई राहत नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने सहायक प्राध्यापक (वनस्पति विज्ञान) पद के लिए आवेदन करने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता अनुराधा अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित है, जिसने लोक सेवा आयोग द्वारा 30 दिसंबर 2022 को जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। इस विज्ञापन में कुल 126 पद घोषित किए गए थे। विज्ञापन की शर्तों के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को 25 अक्टूबर 2024 तक दस्तावेज सत्यापन के लिए प्रस्तुत करना अनिवार्य था, अन्यथा उम्मीदवारी स्वतः निरस्त की जाना थी। लोक सेवा आयोग ने दो बार बढ़ाई समय सीमा
कोर्ट को बताया कि लोक सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों को अवसर देते हुए दस्तावेज जमा करने की समय सीमा में दो बार संशोधन किया। पहले 3 हजार रुपए विलंब शुल्क के साथ और इसके बाद 25 हजार रुपए विलंब शुल्क के साथ अंतिम तिथि बढ़ाकर 11 नवंबर 2024 कर दी गई। इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने अपने दस्तावेज 25 नवंबर 2024 को प्रस्तुत किए, जिस पर आयोग ने उसकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी। आयोग की सख्त दलील : लोक सेवा आयोग की ओर से कहा गया कि पूरी चयन प्रक्रिया विज्ञापन की शर्तों से बंधी होती है। समय सीमा दो बार बढ़ाने के बावजूद याचिकाकर्ता ने दस्तावेज जमा नहीं किए और लंबे समय तक निष्क्रिय रही। साथ ही बीमारी के आधार पर अक्षम होने का कोई ठोस या विश्वसनीय प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया।


