भोपाल नगर निगम के कुल 75 असिस्टेंट और सब इंजीनियर सजा के तौर पर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के सहायक बना दिए गए हैं। ये निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को अपने सिविल से जुड़े काम की जानकारी नहीं दे सके थे। नाराज होकर कमिश्नर ने इन्हें बीएलओ का सहायक बनाते हुए एसआईआर डिजिटाइजेशन का काम सौंप दिया। इंजीनियरों को यह अनोखी सजा 4 दिसंबर तक के लिए दी है। हालांकि आदेश 27 नवंबर को जारी हुआ था, तब एसआईआर की तारीख नहीं बढ़ी थी। दूसरी ओर कमिश्नर जैन साउथ कोरिया गई हुई हैं, जो 6 दिसंबर की सुबह लौटेंगी। ऐसे में प्रभारी कमिश्नर अंजू कुमार नया आदेश जारी करेगी। इसलिए नाराज हुईं कमिश्नर जैन
सभी इंजीनियर सिविल के हैं। बताया जाता है कि निगम कमिश्नर जैन ने असिस्टेंट और सब इंजीनियर से उनके सिविल के काम के बारे में पूछा था। जिसके बारे में 15 दिन में भी जवाब नहीं मिल सका था। जानकारी देने पर देरी होने से कमिश्नर नाराज हो गई थीं। इसके बाद इनकी ड्यूटी विधानसभा के हिसाब से बीएलओ के सहायक के रूप में लगा दी। आदेश में लिखा- सुबह 7 बजे से रात्रि चौपाल तक ड्यूटी करें
कमिश्नर जैन ने अपने आदेश में कहा है कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी, ईआरओ जरूरत के हिसाब से इन इंजीनियरों का अन्य मतदान केंद्रों में भी उपयोग कर सकते हैं। यह प्रतिदिन सुबह 7 बजे से ड्यूटी करेंगे, जो रात्रि चौपाल खत्म होने तक मतदाताओं से गणना फार्म एकत्रित कर डिजिटाइजेशन का कार्य समय अवधि में करेंगे। आदेश में कहा- सिविल कार्यों में प्रगति नहीं
निगम कमिश्नर के आदेश में लिखा है कि नगर निगम भोपाल के सिविल कार्यों में प्रगति नहीं होने के कारण बूथ लेवल ऑफिसर के सहायक के रूप में इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई जाती है। विधानसभा के जिन बूथ पर काम कमजोर, वही लगाया
खास बात ये है कि सभी इंजीनियर को ऐसे बूथ पर तैनात किया गया है, जो परफार्मेंस परफॉरमेंस में फिसड्डी के मामले में टॉप-20 है। यानी, जो इंजीनियर अपने सिविल के काम सही ढंग से नहीं कर सके, उन्हें बूथ पर एसआईआर का जिम्मा सौंपा गया है। सहायक यंत्री और उप यंत्रियों की विधानसभा वार तैनाती
इस मामले में उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि सहायक यंत्री और उप यंत्रियों की विधानसभा वार तैनाती की गई है। वे एसआईआर के काम में जुटे हैं।


