लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में कविता प्रतियोगिता:पद्मश्री आर्टिस्ट भूरी बाई की प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र; समापन कार्यक्रम में विजेता होंगे घोषित

भोपाल के भारत भवन में लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के तीसरे और अंतिम दिन, रविवार को कविता प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान पैरा खिलाड़ियों, देश के प्रधानमंत्री और आरबीआई गवर्नर से जुड़े विषयों पर सत्र हुए। साथ ही, परिसर के अन्य सभागार में पद्मश्री ट्राइबल आर्टिस्ट भूरी बाई की मॉडर्न आर्ट प्रदर्शनी लगी और पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्र भी प्रदर्शित किए गए। सामाजिक मुद्दों पर गूंजी कविताएं फेस्टिवल के अंतिम दिन युवाओं की कविता प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण जैसे विषय दिए गए। इस कविता प्रतियोगिता सहित अन्य आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार आज शाम के समापन समारोह में प्रदान किया जाएगा। इन विषयों पर हुए सेशन नीरजा चौधरी की किताब “हाउ पीएम्स डिसाइड” पर चर्चा भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में लेखिका और पूर्व पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी किताब “हाउ पीएम्स डिसाइड” पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि, यह किताब कोविड महामारी के दौरान लिखी गई और इसमें देश के छह पूर्व प्रधानमंत्रियों के छह बड़े फैसलों का विश्लेषण किया गया है। इसमें इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वीपी सिंह, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को शामिल किया गया है। किताब में इन नेताओं की विचारधारा, उनके निजी विश्वास और फैसलों को प्रभावित करने वाले विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। “आइकॉनिक ट्रीज ऑफ इंडिया” – भारत के अनोखे पेड़ों पर चर्चा फेस्टिवल के अंतिम दिन “आइकॉनिक ट्रीज ऑफ इंडिया” पर एक खास सत्र आयोजित किया गया। इस किताब के लेखक, प्रकृतिवादी और वनस्पति वैज्ञानिक एस नतेश ने बताया कि, उन्होंने 20 से अधिक राज्यों में भ्रमण कर 75 अनोखे पेड़ों को अपनी किताब में शामिल किया है। इस पुस्तक में पेड़ों की वैज्ञानिक जानकारी, उनका इतिहास और उनका महत्व बताया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित 5000 साल पुराने पारिजात वृक्ष का भी उल्लेख किया। “जस्ट ए मर्सिनरी” – पूर्व आरबीआई गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव की यादें पूर्व आरबीआई गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने अपनी आत्मकथा “जस्ट ए मर्सिनरी, मेमोयर्स ऑफ ए आरबीआई गवर्नर” पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि, यह किताब उनके जीवन और करियर पर आधारित है। इस दौरान उन्होंने बतौर आरबीआई गवर्नर एक व्यक्ति पर जिम्मेदारी और चुनौतियों पर भी चर्चा की।

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