लखनऊ में 15 साल के लड़के की लिफ्ट में फंसकर मौत हो गई। शुक्रवार शाम करीब 4 बजे वह शोरूम की तीसरी मंजिल से लिफ्ट के जरिए नीचे उतर रहा था। लिफ्ट के भीतरी हिस्से और दीवार के बीच गैप था। जिसमें उसका पैर फंस गया। लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी। काफी खून बह चुका था। घटना की जानकारी मिलते ही सरोजनी नगर पुलिस और फायर स्टेशन के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। किसी तरह लड़के को बाहर निकाला गया। लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई। नाबालिग ने एक महीने पहले बतौर सफाई कर्मी नौकरी शुरू की थी। शोरूम के कर्मचारी लड़के को बचाने के बजाय, मौके से भाग निकले। पहले घटना की तीन तस्वीरें देखिए… एक महीने पहले ही शुरू किया था काम
लखीमपुर के गोला गोकर्णनाथ के रहने वाले व्यापारी सुरेश अग्रवाल की लखनऊ में सरोजनी नगर के ट्रांसपोर्ट नगर में पांच मंजिला बिल्डिंग है। इस बिल्डिंग में अशोक लीलैंड की हमराही ऑटो नाम से तीन पहिया और चार पहिया वाहनों का शोरूम और एजेंसी है। पीजीआई के वृंदावन योजना सेक्टर- 5 निवासी शैलेंद्र राजवंशी का 15 वर्षीय बेटा शरद राजवंशी एक माह से एजेंसी पर सफाई कर्मी के रूप में नौकरी कर रहा था। 13 दिसंबर, 2024 को उसकी नौकरी लगी थी। दूसरी मंजिल पर रुकी लिफ्ट
शरद शुक्रवार की शाम 4 बजे किसी काम से तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर जा रहा था। इस दौरान उसका पैर लिफ्ट में फंस गया। लिफ्ट दूसरी मंजिल पर पहुंचते ही रुक गई। काफी देर तक लिफ्ट ऊपर नीचे नहीं गई तो लोगों ने लिफ्ट मैन अनिल प्रजापति को इसकी सूचना दी। अनिल ने जब लिफ्ट चेक की तो दूसरी मंजिल पर शरद राजवंशी उसमें फंसा मिला। इसके बाद घटना की सूचना फायर स्टेशन और सरोजनीनगर पुलिस को दी गई। सूचना के बाद पहुंचे दमकल कर्मियों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला। उसे लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किशोर को निकालने के लिए क्रेन की मदद ली
लिफ्ट में फंसे शरद को निकालने के लिए क्रेन की मदद ली गई। रेस्क्यू के दौरान लिफ्ट अचानक नीचे न चली जाए। इसके लिए क्रेन से लिफ्ट को रोके रखा गया। इसके बाद दमकल कर्मियों ने घायल किशोर को बाहर निकाला। शोरूम के लोग घटना के बाद भागे
सुरेश अग्रवाल की एजेंसी और शोरूम में करीब 40 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन जब उन्हें घटना की जानकारी हुई तो सब वहां से भाग गए। मां बोली- हमको अस्पताल बुलाया
मृतक किशोर की मां नैना राजवंशी ने बताया कि मेरे पति शैलेन्द्र राजवंशी की एक साल पहले एक्सीडेंट में घायल हो गए थे। इसके बाद से वे काम पर नहीं जाते थे। बेटे शरद ने करीब एक महीने पहले ही काम शुरू किया था। उन्होंने बताया कि मुझे उसके ऑफिस से फोन आया था। लोकबंधु अस्पताल बुलाया था। वहां जाकर देखा तो मेरे बेटे की मौत हो चुकी थी। नैना के तीन बच्चे हैं, जिनमें शरद सबसे बड़ा था। इसके बाद बेटा रणवीर (14) और बेटी (9) परी हैं। —————————
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