इंदौर-उज्जैन के बीच बनने वाले ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में अधिग्रहित होने वाली जमीन के बाजार भाव से दाम दिलाने के लिए किसान संघर्ष कर रहे हैं, इस बीच सरकार ने इस कॉरिडोर को बनाने का ठेका मंजूर कर दिया है। यह ठेका 1089 करोड़ में लुधियाना की सौगल इन्फा. प्रोजेक्ट प्रा.लि. कंपनी को मिला है। 48 किलोमीटर लम्बे इस ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए फिलहाल धारा 21 के तहत भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए किए जाने वाले भू-अर्जन का विरोध भी किसानों द्वारा किया जा रहा है। इस रोड पर तीन फ्लाईओवर और छोटे-बड़े 35 पुल-पुलियाएं बनाए जाएंगे। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड फोर लेन हाईवे होगा, जिसमें दोनों तरफ सर्विस लेन भी होगी, जिससे इंदौर से उज्जैन की यात्रा केवल 30 मिनट में पूरी हो सकेगी और सिंहस्थ 2028 के लिए यह मार्ग बहुत महत्वपूर्ण होगा। इसके बनने से यात्रा का समय भी घटकर 40-45 मिनट रह जाएगा। ऐसे चल रहा है जमीन अधिग्रहण का काम एसडीएम घनश्याम धनगर के मुताबिक, पूर्व में अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों के अधिग्रहण के लिए धारा 19 के तह प्रकाशन किया जा चुका है। इसमें किसानों के स्वामित्व, रकबे की जमीन, जमीन का विवरण सार्वजनिक किया गया और उसके आधार पर सुनवाई सहित अन्य प्रक्रिया जारी है। अभी धारा 21 के तहत कार्रवाई की है। कुछ समय में फिर भूअर्जन अधिनियम के तहत अवॉर्ड पारित किया जाएगा। उज्जैन से पीथमपुर की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी इस कॉरिडोर का निर्माण एयरपोर्ट के आगे गोम्मटगिरी के पास पितृ पर्वत से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामण गणेश तक बनेगा, जिससे सिंहस्थ के मद्देनजर इंदौर से उज्जैन जाने के लिए एक और महत्वपूर्ण सड़क उपलब्ध हो सकेगी। इससे पीथमपुर से भी कनेक्टिविटी बढ़ेगी और एयरपोर्ट से भी सीधे उज्जैन पहुंचा जा सकेगा। किसान इसलिए कर रहे विरोध किसानों की प्रमुख मांग है कि जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाए, न कि केवल सरकारी गाइडलाइन के अनुसार। इसके साथ ही किसानों ने ग्रीन फील्ड रोड की ऊंचाई कम करने और इसे सामान्य हाईवे के रूप में विकसित करने की मांग की, ताकि आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों को भी इसका लाभ मिल सके।


