भास्कर न्यूज | लुधियाना गगन नगर स्थित 33 फुटा रोड ग्यासपुरा में श्रीमद्भागवत कथा समिति द्वारा आयोजित समागम के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का अद्भुत वर्णन हुआ। कथा व्यास पं. अवधेश पांडे ने महाभारत के मर्मस्पर्शी प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि भगवान अपने भक्तों के संकट स्वयं झेल लेते हैं। कथा के दौरान जब अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए विनाशकारी ब्रह्मास्त्र का प्रसंग आया तो समूचा पांडाल भक्ति रस में डूब गया। पं. अवधेश पांडे ने बताया कि महाभारत युद्ध के पश्चात जब श्रीकृष्ण द्वारिका प्रस्थान करने लगे तब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने करुण विलाप करते हुए उनकी शरण ली। उत्तरा ने आर्तनाद किया पाहि पाहि महायोगिन, देव देव जगतपते (हे योगेश्वर! मेरी रक्षा करें)। व्यास ने विस्तार देते हुए कहा कि पांडव वंश को समाप्त करने के लिए अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ की ओर ब्रह्मास्त्र छोड़ा था। भक्त की पुकार सुनकर श्रीकृष्ण ने तत्काल अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण किया और गर्भ में प्रवेश कर बालक की रक्षा की। यही बालक आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट राजा परीक्षित के नाम से विख्यात हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पार्षद उमा मिश्रा एवं राजेश मिश्रा ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान आचार्य प्रदीप शर्मा, वेद प्रकाश पांडे, जनक पांडे, डॉ. विनोद मौर्य, राज बहादुर पाल, और अन्य मौजूद रहे।


