लेखक अक्षत व अटूट होंगे लाल किले पर 15 अगस्त समारोह के साक्षी

रांची के दो युवा लेखक अक्षत देव व अटूट संतोष को इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले इस भव्य समारोह में दोनों अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया द्वारा आयोजित ‘पीएम युवा मेंटरशिप फॉर यंग ऑथर्स’ प्रोग्राम के देशभर के युवाओं से किताबें लिखने के लिए सब्जेक्ट मांगा गया था। करीब 16 हजार युवाओं ने इस स्कीम के तहत अप्लाई किया था। यूनिक सब्जेक्ट और पठनीयता को देखते हुए तीन स्तरीय प्र​क्रिया के बाद देशभर से 75 युवा लेखकों का चुनाव हुआ। इनमें झारखंड से 2 युवा 25 वर्षीय अक्षत देव और 24 वर्षीय अटूट संतोष का चुनाव हुआ। इन्हें किताब लिखने और रिसर्च के लिए 3 लाख रुपए मिले थे। पिछले साल 11 फरवरी को दोनों राष्ट्रपति से भी संवाद कर चुके हैं। अटूट ने लिखी अज्ञात योद्धाओं की कहानी रांची के रहने वाले अटूट संतोष ने संत जेवियर्स कॉलेज से बीएड िकया। उनकी किताब ‘ससन : आजादी के अज्ञात मतवाले मुंडा आदिवासियों की कहानी’ एक हिस्टोरिकल फिक्शन है। ससन कहानी भारत के सबसे प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलन की अनसुनी कहानी है जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दर्ज नहीं किया जा सका है। अटूट ने प्राइमरी स्कूलिंग बिशप वेस्टकॉट नामकुम से की है। उनकी कविताएं झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग पत्रिका ‘आदिवासी’ में प्रकाशित हैं। उनकी मां वंदना टेटे, पिता अश्विनी कुमार पंकज साहित्य के क्षेत्र में जाना-माना नाम है। नानी स्व. रोज केरकेट्टा प्रख्यात खड़िया साहित्यकार थीं। अक्षत देव ने संथाल हूल पर लिखी किताब अक्षत देव मूल रूप से मांडर के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्रोग्रेसिव चिल्ड्रेंस स्कूल और डीएवी कपिलदेव स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने गोस्सनर कॉलेज से भौतिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में, अक्षत एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग टीम लीडर के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन, उनका जुनून हमेशा से लेखन रहा है। अक्षत की पुस्तक “सॉन्ग ऑफ द रेबल : स्टोरी ऑफ द 1855 संथाल रिबेलियन ऑफ सिदो एंड कान्हू मुर्मू’ 1855 के हूल क्रांति पर आधारित है। यह उपन्यास सिदो-कान्हू के बचपन और संथाल संस्कृति का जीवंत चित्रण करता है। इस उपन्यास का चयन प्रधानमंत्री युवा योजना में भी हुआ था, जिसके तहत उन्हें ₹3 लाख का मेंटरशिप पुरस्कार मिला। देशभर के 100 युवा लेखक हैं आमंत्रित, इनमें से दो झारखंड के

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