18 दिन बाद भी आरआर कॉलेज में घूम रहा लेपर्ड पिंजरे में नहीं आया। टाइगर का पिंजरा मंगाया गया। उसमें लेपर्ड का पसंदीदा भोजन मरा हुआ डॉग बांधा गया। लेकिन रात को लेपर्ड पिंजरे के आसपास ही नहीं आया। इससे पहले छोटे पिंजरे में बकरा व मुर्गा बांधा तो लेपर्ड आसपास आया लेकिन पिंजरे के अंदर नहीं घुसा। अब भी कॉलेज में आने वाले स्टाफ व स्टूडेंट्स में डर है। जिसके कारण रोजाना शाम 5 बजे पूरा कॉलेज खाली करा लिया जाता है। आसपास की कॉलोनियों में भी लेपर्ड की दहशत है। कभी जंगल से बाहर आया तो बड़ा खतरा है। अब तक लेपर्ड जंगल में ही है। केमिस्ट्री लैब के आसपास पगमार्क होना बताया वनकर्मियों ने सुबह पगमार्क नहीं देखे। लेकिन दोपहर में बताया गया कि लेपर्ड के पगमार्क कमेस्ट्री लेब के आसपास दिखे हैं। हालांकि 1 दिसंबर के बाद लेपर्ड दिन के समय किसी को नहीं दिखा है। जबकि अगले दिन सुबह कई जगहों पर पगमार्क मिले हैं। दो-तीन बार कैमरा ट्रैप में भी तस्वीर आई हैं। जिससे जाहिर है कि लेपर्ड दिन के समय आराम करता है और रात को अधिक घूमता है। वनकर्मी अब तक लेपर्ड के पिंजरे में आने का इंतजार करने में लगे हैं। इसके अलावा दिन के समय पकड़ने के प्रयास नहीं किए गए। 48 हैक्टैयर में जूली फ्लोरा का जंगल आर आर कॉलेज में जूलीफ्लोरा का करीब 48 हैक्टेयर का जंगल है। बीच में कॉलेज का भवन है। ये पूरा जंगल जूलीफ्लोरा से भरा है। जिसमें नील गाय सहित कई तरह के वन्यजीव भी हैं। लेपर्ड को यहां आसानी से शिकार भी मिल जाता है और बीच-बीच में कई जगहों पर पानी है। रात को जंगल के बार खाली खेतों में भी घूमने का मौका रहता है। सबसे अधिक मंदिर के आसपास आया लेपर्ड सबसे अधिक लेपर्ड जंगल परिसर में बने मंदिर के आसपास देखा गया। यहां कई बार पगमार्क मिले हैं। दो पिंजरे भी यहीं लगे हैं। पहले यहां छोटे पिंजरे लगे थे। 15 दिन बाद में बड़ा पिंजरा भी यहीं पर लगाया गया। पिंजरे में मंगलवार रात को डॉग को रखा गया था। जो पहले से मरा हुआ था। लेकिन रात को लेपर्ड पिंजरे के आसपास नहीं आया। लेकिन उसके पगमार्क कॉलेज के कैंपस में बनी कमेस्ट्री लैब के आसपास दिखे हैं।


