कोविड के समय सरकार की तरफ से लॉकडाउन लगा दिया गया था। जिससे लोग घरों से बाहर न निकले और घरों में कैद हो गए थे। लोग खुद को फिट रखने के लिए तरह-तरह की गतिविधियां कर रहे थे। ऐसे में खन्ना की रहने वाली रिदम शर्मा ने लॉकडाउन के समय खुद को फिट रखने के लिए एथलेटिक्स में शॉटपुट शुरू किया। लेकिन कोच के विदेश जाने के बाद उन्होंने 2024 में गेम छोड़ दिया। इस साल चार महीने पहले उसने दोबारा वेटलिफ्टिंग शुरू की और अब उन्होंने गाजियाबाद के मोदी नगर में हुई खेलो इंडिया अस्मिता नॉर्थ जोन जूनियर और सीनियर में जीता दो ब्रांज मेडल जीते। अब वह आल इंडिया इंटर जोन वुमन लीग में हिस्सा लेंगी। रोजाना 3 घंटे अभ्यास से कामयाबी रिदम ने जिम जाना नहीं छोड़ा। इस दौरान जिम में उसे वेटलिफ्टिंग कोच शेरु सिंह और शुभकरन मिले। उन्होंने वेटलिफ्टिंग करने की सलाह दी। जिसके बाद उसने चार महीने पहले सुबह और शाम मैदान में जाने लगी। वेटलिफ्टिंग का अभ्यास शुरू कर दिया। रिदम शर्मा ने वेटलिफ्टिंग में स्कूल स्टेट लेवल पर गोल्ड जीता। अभी हाल में ही गाजियाबाद में चार से आठ दिसंबर तक आयोजित खेलो इंडिया अस्मिता नॉर्थ जोन जूनियर और सीनियर में 86 किलोग्राम भार वर्ग में दो ब्रांज मेडल जीते। साथ ही आल इंडिया इंटर जोन वुमन लीग के लिए क्वालीफाई कर लिया। लिया। कोच शेरू सिंह बताया कि रोजाना वह तीन घंटे अभ्यास करती है और 12वीं में पढ़ रही है। पहले शाटपुट में और अब वेटलिफ्टिंग में कर रही है सूबे का प्रतिनिधित्व जिसकी तैयारी में वह जुटी हुई है और उम्मीद है कि वह गोल्ड जीतेगी। वह अब तक वेटलिफ्टिंग में चार मेडल जीत अपने नाम कर चुकी है। खन्ना की रहने वाली रिदम शर्मा ने बताया कि उनके पिता नवनीत शर्मा बिजनेसमैन है। जबकि माता पूनम शर्मा हाउस वाइफ हैं। उसने बताया कि कोविड के समय सरकार की तरफ से लॉकडाउन लगाया गया था। जिसके चलते वह घर से निकल नहीं पा रही थी और मोटी हो रही थी। उसने खन्ना में ही कोच बहादुर सिंह की देखरेख में शॉटपुट गेम शुरू किया। स्टेट लेवल पर ब्रांज मेडल जीता। लेकिन 2024 में उसके कोच विदेश चले गए। जिसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स बंद कर दिया।


