लॉरेंस ने जेल में बैठकर पूर्व सरपंच को मरवाया था:आनंदपाल गैंग के सुभाष ने जला दिया था अपना मोबाइल; अजमेर जेल में हुई थी प्लानिंग

सीकर में 9 साल पहले राजनीतिक रंजिश में पूर्व सरपंच सरदार राव को दिनदहाड़े गोलियों से भूना गया था। मर्डर के लिए लॉरेंस बिश्नोई ने अपने 4 शूटर्स को सीकर भेजा था। इस मर्डर की पटकथा गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आनंदपाल गैंग के सुभाष बराल ने अजमेर सेंट्रल जेल से लिखी थी। मर्डर की सुपारी देने वाला भी बराल का चाचा था। लॉरेंस ने जेल से ही अपने शूटर्स को मर्डर के लिए भेजा था। बराल ने उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम करवाया था। मर्डर होते ही जेल में बराल ने अपना मोबाइल जला दिया था। मामले में 9 साल बाद फैसला आया है। जिसमें 9 दोषियों को सजा दी गई है। पढ़िए- इस हाईप्रोफाइल मर्डर की पूरी कहानी… 1- राजनीतिक रंजिश बनी थी मर्डर का कारण सरदारराव सीकर के पास जुराठड़ा गांव से 2010 से 2014 तक सरपंच रहे थे। 2015 के चुनाव में हार गए थे। सरदारराव को गांव की राजनीति में सक्रिय रहने वाले हरदेवा राम के बेटे संदीप ने हराया था। सरपंच बनने के बाद संदीप की टीचर की सरकारी नौकरी लग गई थी। इस कारण उसे सरपंच पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हरदेवा राम गांव की राजनीति में काफी सक्रिय था। उस पर पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट का मामला चल रहा था। बेटे के सरपंच पद से इस्तीफा देने के बाद उपचुनाव होने थे। ऐसे में वो अपने ही परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़वाना चाहता था। वहीं, सरदार राव भी चुनाव लड़ने की तैयारी में था। ग्राम पंचायत में माहौल बन चुका था कि इस बार सरदार राव ही सरपंच बनेगा। ऐसे में हरदेवा राम को चुनाव हारने का डर सताने लगा था और उसने सरदार राव को रास्ते से हटाने की ठान ली थी। 2- चुनाव से पहले सीकर कलेक्ट्रेट में मारने की दी थी धमकी सितंबर 2017 में उप चुनाव होना प्रस्तावित था। इससे पहले जुलाई 2017 में वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने का काम चल रहा था। 28 जुलाई को सरदार राव और हरदेवा राम अपने-अपने लोगों के नाम जुड़वाने के लिए सीकर कलेक्ट्रेट की निर्वाचन शाखा पहुंचे थे। यहां दोनों का आमना-सामना हुआ था। तब हरदेवा राम ने सरदार राव को धमकी दी थी- “चुनाव से पहले तुम्हें देख लूंगा और मरवा दूंगा।” अब पढ़िए, सरदारराव की हत्या की जेल में कैसे हुई थी प्लानिंग 1- हरदेवाराम ने अपने भतीजे आनंदपाल गैंग के सदस्य सुभाष बराल को दी थी सुपारी हरदेवाराम ने अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद अपने भतीजे और आनंदपाल गैंग के सदस्य सुभाष बराल को कॉल किया था। सुभाष बराल जेल में मोबाइल इस्तेमाल करता था। हरदेवा राम ने सुभाष से चुनाव से पहले सरदार राव को रास्ते से हटाने की बात कही थी। तब सुभाष बराल ने जेल में रहते हुए ही सरदार राव को जान से मारने की प्लानिंग की थी। 2- लॉरेंस ने कहा था-मर्डर करवा दूंगा, रेकी करवाओ उस समय गैंगस्टर लॉरेंस भी अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद था। हॉस्पिटल में मेडिकल चेकअप के दौरान लॉरेंस और सुभाष ने आपस में बात की थी। सुभाष की बात सुनने के बाद लॉरेंस ने मर्डर करवाने की हामी भरी थी। उसे कहा था- ‘मेरे आदमी काम कर देंगे, तुम सिर्फ सरदार राव की रेकी करवाना शुरू कर दो।’ इसके बाद लॉरेंस ने जेल से ही अपनी गैंग से संपर्क किया था। वहीं, सुभाष बराल ने अपने परिचित रानोली गांव के ओमप्रकाश को वॉट्सऐप पर एक मैसेज किया था। मैसेज में दो-तीन लोगों को सुरक्षित जगह पर रुकवाने की व्यवस्था और सरदार राव की रेकी करवाने की बात लिखी थी। बराल के मैसेज से ओमप्रकाश डर गया था और अपना मोबाइल बंद कर दिया था। 3- लॉरेंस ने अपने शूटर्स को सीकर बुलाया था लॉरेंस ने 20 अगस्त 2017 को अपने चार शूटरों को सीकर बुलाया था। तब सुभाष बराल ने अपने गांव (बराल) के ओमप्रकाश को शूटर्स के रुकने की व्यवस्था करवाने को कहा था। ऐसे में ओमप्रकाश ने दादिया में खुद के आधार कार्ड से होटल में दो कमरे बुक करवाकर शूटर्स को रुकवाया था। चारों शूटर 20 अगस्त 2017 को दादिया पहुंचे थे। अगले दिन 21 अगस्त की सुबह 9:30 बजे सीकर शहर आए थे। इसके बाद जेल से ही सुभाष बराल ने अपने गांव के मुकेश कुमार को कॉल किया था। फोन पर कहा था- ‘मेरे लोग आ रहे हैं, सरदार राव दुश्मन है, उसका काम तमाम करना है।’ बराल के मैसेज के बाद मुकेश गोकुलपुरा बाईपास पर पहुंचा था,जहां स्विफ्ट गाड़ी में शूटर्स मिले थे। 4- शूटर्स ने स्विफ्ट गाड़ी की नंबर प्लेट बदली थी,बाइक से रेकी की शूटर्स और मुकेश पलसाना, जुराठड़ा और शाकंभरी में सरदार राव की रेकी करने निकले लेकिन वो नहीं मिला। इसके बाद सुभाष बराल के कहने पर वे पिपराली बाईपास के होटल में चले गए थे। वहां बराल ने भानुप्रताप और यतेन्द्रपाल से शूटरों के रुकने का इंतजाम करवाया था। अगले दिन सुबह 22 अगस्त 2017 को भानुप्रताप और यतेन्द्रपाल ने एक नई नंबर प्लेट बनवाकर स्विफ्ट गाड़ी पर लगा दी। 22 अगस्त 2017 को ही जेल से सुभाष बराल ने परिचित विजयपाल नागवा को कॉल किया था। विजयपाल ने उसके कहने पर अपने परिचित राजू को बाइक से शूटर्स और मुकेश के पास होटल भेजा था। मुकेश ने राजू की बाइक से पलसाना और आस-पास के गांव में सरदारराव की रेकी की थी। बाइक वापस देकर मुकेश और शूटर्स गाड़ी में लोसल चले गए थे। वहां सुनील और कुलदीप से मिले थे। कुलदीप ने अपने मकान पर उनके रुकने और खाने की व्यवस्था की थी। 5- हत्या के बाद जेल में सुभाष बराल ने जलाया था अपना मोबाइल 23 अगस्त को मुकेश और कुलदीप सरदार राव की रेकी करते हुए पलसाना आ गए। दोनों बाइक पर थे। वहीं, गाड़ी में बैठे शूटर पीछे चल रहे थे। रास्ते में एक शूटर मुकेश के साथ बाइक पर बैठ गया। तीन शूटर और कुलदीप गाड़ी में बैठे थे। पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना की दुकान पर सरदार राव बैठा दिखाई दिया था। इसके बाद मुकेश और चारों शूटर गाड़ी में बैठकर दुकान के बाहर जाकर रुके। तीन शूटर दुकान के अंदर गए और कुर्सी पर बैठे सरदार राव पर अंधाधुंध गालियां दाग दी। सरदार राव को मारकर शूटर्स सीकर के जीणमाता इलाके में पहुंचे। वहां गाड़ी की नंबर प्लेट को बदलकर जयपुर की तरफ चले गए थे। इस दौरान शूटर्स ने वॉट्सएप पर सुभाष बराल को मैसेज कर कहा था कि अब काम हो चुका है। सुभाष ने तुरंत जेल में अपना मोबाइल जला दिया। घटना के बाद बराल और लॉरेंस से पूछताछ हुई तब सामने आया कि लॉरेंस ने यूपी के रविंद्र के जरिए शूटर्स भिजवाए थे। इनमें संपत नेहरा भी शामिल था। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करके कोर्ट में चालान पेश किया। दुकान में लगे CCTV बदमाश नजर आए थे, देखिए- ये भी पढ़ें… गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई पूर्व सरपंच मर्डर केस में बरी:3 को उम्रकैद, 6 को 10-10 साल की सजा; दुकान में घुसकर गोलियों से भूना था सीकर में पूर्व सरपंच सरदार राव मर्डर केस में करीब 9 साल बाद आज एससी-एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया है। 3 दोषियों को उम्रकैद और 6 को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। (पूरी खबर पढ़ें)

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