जिला मुख्यालय से 120 किमी दूर स्थित कोटड़ा आने-जाने के लिए ग्रामीण आज भी निजी बसों और टैंपों पर निर्भर हैं। इनकी संख्या भी सीमित है। ऐसे में लगभग हर वाहन ओवरलोड चलता है।इस रूट पर रोडवेज की महज तीन बसें ही उपलब्ध हैं। जबकि, कोटड़ा रूट से रोज हजारों लोग रोजगार, इलाज और अन्य कामों के लिए शहर आते हैं। 10 साल पहले कोटड़ा के लिए रोजाना 27 बसें चलती थीं। रोजाना 5 हजार से ज्यादा लोग इनमें सफर करते थे। फिर धीरे-धीरे बसों की संख्या घटती गई। इन्हीं हालातों के चलते बुधवार को कोटड़ा क्षेत्र में ससरेठी घाटा में एक ओवरलोड जीप खाई में उतर गई। हादसे में एक मासूम सहित तीन लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए। यह जीप 20 साल पुरानी थी। घाटे से उतरते समय इसके ब्रेक फेल हो गए थे। इसमें 27 लोग सवार थे। नौ लोगों को गंभीर हालत में रेफर किया गया था। गत वर्ष भी बेकरिया थाना क्षेत्र में ओवरलोड टैंपों की ट्रेलर से टक्कर होने से 5 लोगों की मौत और 10 घायल हो गए थे। 5 सीटर ऑटो में 15 सवारी बैठी थी। ओगणा, पानरवा के लिए चार माह बस चलाई, फिर बंद जून 2025 में गोगुंदा, ओगणा, पानरवा रूट पर रोडवेज बस शुरू की गई थी। यह 4 माह तक चली। फिर इसे बंद कर दिया गया। यह सुबह 5:30 बजे पानरवा से रवाना होकर 9 बजे उदयपुर पहुंचती थी। दोपहर 3:15 बजे उदयपुर से रवाना होकर शाम 6:30 बजे पानरवा पहुंचती थी। उदयपुर से सुबह 7:30 व कोटड़ा से दोपहर 2:15 बजे बाद कोई बस नहीं वर्ष 2013-14 में कोटड़ा के लिए 10 ग्रामीण बसें शुरू की गई थीं। ये बसें साल 2016 में बंद हो गईं। 2017 तक रोडवेज की 17 गाड़ियां चलती थीं। अभी पहली बस सुबह 5:45 बजे वाया झाड़ोल होकर जाती है। इसके बाद वाया देवला होते हुए सुबह 6:45 बजे रवाना होती है।तीसरी बस सुबह 7:30 बजे झाड़ोल-पानरवा होते हुए जाती है। वापसी में ये बसें सुबह 11:30, दोपहर 1 बजे, दोपहर 2:15 बजे रवाना होती हैं। इसके बाद उदयपुर आने के लिए कोई बस नहीं है। उदयपुर से कोटड़ा जाने वाली बसें 3:30 से 4 घंटे का समय लेती हैं। ये सभी 48 सीटर हैं। इस मामले को लेकर आगार प्रबंधक हेमंत शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।


