लोकतंत्र सेनानियों को राहत:4 हजार चिकित्सा भत्ता व रोडवेज में फ्री यात्रा, जिनके पास बंद रहने का दस्तावेज नहीं उन्हें भी सम्मान राशि

राज्य सरकार ने उन लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रितों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें अब तक आपातकाल की अवधि में जेलों या थानों में बंद रहने के सबूत के अभाव में सम्मान राशि नहीं मिल रही थी। ऐसे वंचित लोग अब स्वयं का शपथ पत्र के साथ आवेदन पेश कर लोकतंत्र सेनानियों को मिलने वाली सुविधाओं को फायदा ले सकेंगे। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने दो दिन पहले नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। गौरतलब है कि लोकतंत्र सेनानियों को 20 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि, चार हजार रुपए चिकित्सा भत्ता और रोडवेज बसों में परिवहन की निशुल्क सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 1140 लोकत्रंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रितों को इसका फायदा मिल रहा है। नए नियमों के तहत इन्हें फिर से आवेदन की जरुरत नहीं होगी। इनको मिल सकेगी सुविधाएं
राजस्थान लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान अधिनियम-2024 को गत साल विधानसभा में पारित करवाया था। लेकिन, इसके नियम अब बनाए गए हैं। बुधवार से यह नियम लागू हो गए हैं। पहले से पात्र सेनानियों को आवेदन करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, नए आवेदकों आपातकाल के दौरान जेल या थानों में बंद किए गए थे। उनके प्रमाश के साथ इसका उन्हें शपथ पत्र देना होगा कि वे किसी अन्य राज्य से ऐसी सुविधा प्राप्त नहीं कर रहे हैं। वहीं, उन लोगों के पास बंद रखे जाने संबंधित को सरकारी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, वे स्वयं का शपथ पत्र के साथ आवेदन दे सकते हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी
नए नियमों के तहत आवेदनों की स्क्रूटनी के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। इसमें पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक और जिला जेल अधीक्षक को सदस्य बनाया गया है। वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। आवेदक को योजना राशि का फायदा दिया जाना है या नहीं। इसका निर्णय जिला कलेक्टर करेंगे।जिला कलेक्टर अगर किसी के आवेदन को नामंजूर कर देते हैं तो संबंधित व्यक्ति आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर राज्य सरकार को अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। क्यों बनाया कानून दरअसल, 2008 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने आपातकाल अवधि 25 जून, 1975 से 21 मार्च 1977 तक जेलों में बंद रहे मीसा बंदियों के लिए पेंशन की सुविधा शुरू की थी। लेकिन इसके बाद 2013 में आई गहलोत सरकार ने इसे बंद कर दिया। वर्ष 2014 में एक बार फिर राज्य में भाजपा सरकार बनी और यह पेंशन फिर शुरू कर दी गई। लेकिन 2019 में जैसे ही कांग्रेस सरकार आईं, योजना को फिर बंद कर दिया गया। वर्ष 2023 में सरकार बनते ही भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए पेंशन योजना को फिर से शुरू कर दिया। पिछले मार्च में नया कानून बना दिया। ताकि, इसे आगे बंद नहीं किया जा सके।

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