लोकल उत्पादों को बढ़ाने स्वदेशी मेला शुरू:हरदा में कृष्ण बारात का स्वागत; 14 जनवरी तक चलेगा आयोजन

हरदा के मिडिल स्कूल ग्राउंड पर रविवार शाम से स्वदेशी मेले का शुभारंभ हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर वोकल’ के सपने को साकार करने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह मेला 4 से 14 जनवरी तक चलेगा। मेले का उद्घाटन स्वदेशी मेला प्रांतीय समन्वयक सुधीर दांतरे और अन्य अतिथियों ने किया। उद्घाटन अवसर पर शहर के गणमान्य लोग, व्यापारी, हस्तशिल्पी और आम नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। आयोजन के पहले दिन शहर की नर्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला से भगवान कृष्ण की बारात निकाली गई। इसमें बृज से आए कलाकार राधा-कृष्ण के रूप में सजकर बग्गी पर सवार होकर नगर में निकले। मेला परिसर में पहुंची बारात का महिलाओं द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। शुभारंभ अवसर पर जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर और स्वदेशी मेला प्रांतीय समन्वयक सुधीर दांतरे विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतुल गोविंद भुस्कुटे और रामदीन पटेल विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थे। स्वदेशी मेले की संयोजक डॉ. एल.एन. पाराशर ने बताया कि मेले का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ देशभर के हस्तशिल्पियों और कारीगरों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने जानकारी दी कि मेले में विभिन्न राज्यों के 130 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों में जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प, बनारसी साडियां और मुरादाबाद के पीतल के हस्तशिल्प सहित अन्य उत्पाद प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आमजन को स्वदेशी से जोड़ने के लिए मेले में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम माहेश्वरी ने स्वदेशी आंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी मूवमेंट को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर भारत पर लगाए जा रहे टैरिफ के बीच देश को आत्मनिर्भर बनाना और भी जरूरी हो गया है। माहेश्वरी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और यदि विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को अपनाया जाए, तो छोटे, कुटीर और मध्यम उद्योगों को बड़ा संबल मिलेगा। उन्होंने 1905 के स्वदेशी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज एक बार फिर उसी भावना को जीवंत करने की जरूरत है, जिससे भारत को 5 ट्रिलियन नहीं बल्कि 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जा सके।

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