लोको पायलट की कठिन नौकरी से समय निकाल संवार रहे युवाओं का भाग्य

भास्कर न्यूज | कोरबा रेलवे में लोको पायलट की जॉब और दूसरी तरफ बच्चों को मुफ्त कोचिंग, इन दोनों में कोई तालमेल नहीं है। नौकरी का आलम यह है कि लोको पायलट को कब बुलावा आ जाए और कितना समय ट्रेन में गुजारना पड़े, यह भी तय नहीं। इसके बाद भी कोरबा रेलवे के लोको पायलट टंकेश महंत नौकरी को पूरी ईमानदारी से पूरा करने के साथ ही युवाओं का भविष्य बदलने के लिए समय निकाल रहे हैं। पिछले 12 साल में वे 500 से अधिक युवाओं को कोचिंग दे चुके हैं। इनमें से 25 से अधिक वे युवा हैं, जिन्हें मंजिल मिल गई है और वे किसी न किसी अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। टंकेश के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित युवा सीजी पीएससी, रेलवे, पुलिस, व्यापमं (शिक्षा विभाग), सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, इंडियन नेवी, असम राइफल, सीआरपीएफ व सीएसएबी में नौकरी पर हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कई जरूरतमंद छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता भी दी है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कमरीद निवासी टंकेश महंत गांव से ही बच्चों को नि:शुल्क देना शुरू कर चुके थे। 2013 में लोको पायलट की नौकरी लगने के बाद भी यह सिलसिला जारी है। यही कारण है कि उनके निःशुल्क शिक्षा, समाज सेवा, बालिका शिक्षा उत्थान और समाज में स्वरोजगार स्थापना, ब्लड व्यवस्था के लिए राजस्थान के जयपुर में 26 जनवरी को भारत सेवा रत्न 2026 से सम्मानित किया जाएगा। इसके पहले भी उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। नि:शुल्क सेवा से करियर संवारना ही उद्देश्य: टंकेश लोको पायलट टंकेश का कहना है कि रेलवे की नौकरी काफी कठिन होती है, यह सही है। परन्तु मन से किया जाने वाला काम कभी बोझिल नहीं होता। अपने कर्तव्य के साथ रेलवे कर्मचारियों व जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क सेवा से करियर संवारने का लक्ष्य बना हुआ है। प्रेरणा कोरबा में एआरएम रहे व वर्तमान में रायपुर में सीनियर डीसीएम अवधेश त्रिवेदी से मिली है। उन्होंने 2015 में प्रशिक्षित करने की सीख दी थी, जो अब तक जारी है।

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