भास्कर न्यूज | बालोद जिला मुख्यालय के कुटुंब न्यायालय में शनिवार को लगी नेशनल लोक अदालत में 25 वैवाहिक प्रकरणों की सुनवाई हुई। इनमें से 21 भरण-पोषण राशि से संबंधित मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो पाया। एक प्रकरण 7 साल से लंबित था। जो चर्चा में रहा। दंपती ने आपसी मतभेद भुलाकर पुनः एक साथ रहने का निर्णय लिया। कुटुंब न्यायालय के अनुसार बालोद निवासी 32 वर्षीय युवक का विवाह एक साल पहले रायपुर जिले की युवती से सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह के बाद दोनों सुखमय दांपत्य जीवन जी रहे थे लेकिन पत्नी के तीज पर्व के लिए मायके जाने और लगभग डेढ़ माह वहां रहने के दौरान कुछ गलतफहमी और छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा। चार महीने बाद पत्नी बिना बताए मायके चली गई और पति के संपर्क के प्रयासों का कोई जवाब नहीं मिला। होली पर पति ने पत्नी को वापस लाने की कोशिश की लेकिन पत्नी ने दांपत्य जीवन को जारी रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद पति ने कुटुंब न्यायालय बालोद में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत दांपत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए वाद दायर किया। पत्नी को समन जारी होने पर वह न्यायालय में उपस्थित हुई। कुटुम्ब न्यायालय में नियुक्त परामर्शदाता अनिता साहू ने दोनों पक्षों के बीच सुलह वार्ता की।


