लोखान में बने आदिवासी बालक और कन्या आश्रम पहुंचने सड़क तक नहीं

भास्कर न्यूज | कुकदूर कुकदूर वनांचल के लोखान पंचायत क्षेत्र में बने आदिवासी बालक और कन्या आश्रम तक पहुंचने के लिए कोई पक्की या कच्ची सड़क नहीं है। बच्चों, पालकों, शिक्षकों और रसोइयों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर आश्रम तक आना-जाना पड़ता है। फिसलन के कारण गिरने का डर बना रहता है। कई बार लोग गिर भी जाते हैं। पंडरिया ब्लॉक के इस क्षेत्र में विशेष अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 250-250 सीटर बालक और बालिका छात्रावास के दो भवन बनाए गए थे। निर्माण के बाद दो-तीन साल तक ये भवन खाली पड़े रहे। उपयोग न होने से भवन जर्जर होने लगे थे। जून 2024 में कलेक्टर कबीरधाम ने आदेश जारी कर एक भवन में आदिवासी बालक आश्रम कुई और चियाडाड और दूसरे भवन में आदिवासी कन्या आश्रम कुई और कामठी को शिफ्ट किया। अब बालिका छात्रावास में कन्या आश्रम कुई और कामठी संचालित हो रहा है। बालक छात्रावास में केवल बालक आश्रम कुई चल रहा है। करोड़ों की लागत से बने इन भवनों तक पहुंचने के लिए कोई पक्की या कच्ची सड़क नहीं बनाई गई। नतीजा, कीचड़ से होकर ही जाना पड़ता है। खेत के रास्ते होकर करते हैं आना-जाना: पंडरिया- कुकदूर मुख्य मार्ग से छात्रावास तक सीसी रोड बनी है। लेकिन कन्या छात्रावास कुई से बालक और कन्या आश्रम कुई तक कोई सड़क नहीं है। लोग पुराने खेतों के रास्ते से होकर पहुंचते हैं। बरसात में फिसलन बढ़ जाती है। दोपहिया वाहन गिर रहे हैं। पालकों ने बताया कि बच्चों को लाने-ले जाने में भारी परेशानी होती है। सीसी रोड बनाना जरूरी यह दूरी 500 से 1000 मीटर के बीच है। यहां सीसी रोड बनाना जरूरी है ताकि बच्चे, शिक्षक, पालक और अन्य लोग आसानी से पहुंच सकें। पहले यह क्षेत्र कुई ग्राम पंचायत में था। तब कन्या छात्रावास कुई तक सीसी रोड बनी थी। अब परिसीमन के बाद यह लोखान पंचायत में आ गया है। लोगों को उम्मीद है कि लोखान पंचायत यहां सीसी रोड बनाएगी।

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