कुआकोंडा विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित लावा -लोहा गांव किरंदुल मुख्य खनन एरिया से लगभग 8 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी एवं घनघोर वनों से पगडंडी मार्ग ही इसे किरन्दुल मुख्यालय से जोड़ती है। इस गांव में पहली बार कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को पेयजल और गांव पहुंचने के रास्ता बनाए जाने का भरोसा दिलाया। कलेक्टर ध्रुव लावा पहुंचे और वहां की जमीनी हकीकत का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरे में कलेक्टर, जिपं सीईओ सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी पहाड़ी उबड़ खाबड़ रास्ते में पदयात्रा करते हुए लावा गांव का सफर तय किया। इस दौरान पहाड़ियों की पगडंडी चलते समय कलेक्टर की मुलाकात अंड़री गांव से आ रहे ग्रामीण लिंगा और कमलेश से हुई। कलेक्टर ने उनसे सामान्य बातचीत करते उनके किरंदुल जाने का कारण पूछा, तो दोनों ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने आधार कार्ड में सुधार कराने के लिए किरंदुल जा रहे हैं। कलेक्टर ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूरस्थ अंचलों के लिए आधार सुधार सहित अन्य जनसेवा सुविधाएं गांव या नजदीकी पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
ग्रामीणों ने कहा- सरकारी सुविधा नहीं पहुंच रहीं : अगर लावा (लोहा) गांव की बसाहट की बात करें, तो यहां मात्र 12 से 15 घर हैं और लगभग 60 से 70 लोग ही निवास करते हैं। सीमित आबादी होने के बावजूद भौगोलिक दुर्गमता के कारण यहां तक शासकीय सेवाओं और सुविधाओं की पहुंच चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इस क्रम में गांव पहुंचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया और उनकी दैनिक समस्याओं व जरूरतों की जानकारी ली।
इसके साथ ही कलेक्टर ध्रुव ने ग्रामीणों से चर्चा कर पीडीएस दुकान को किरन्दुल 11-सी स्थल में प्रारंभ करने की बात कही। कलेक्टर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि लावा (लौहा) जैसे अंतिम छोर के गांवों का विकास प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर तेजी से अमल किया जाएगा। स्वास्थ्य शिविर में ग्रामीणों जांच हुई कलेक्टर के इस लोहा गांव दौरे के साथ स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास के साथ-साथ शिक्षा, पीएचई, आरईएस, पंचायत के मैदानी कर्मचारी भी उक्त गांव पहुंचे इस मौके पर स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए दवाइयां बांटी। आईसीडीएस की टीम ने बच्चों और महिलाओं में पूरक पोषण आहार, टीकाकरण के लिए महिलाओं और बच्चों को चिन्हित किया साथ ही पोषण संबंधित आवश्यक सलाह दी। इस मौके पर कलेक्टर ने ग्राम में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर लगाने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने गांव में ही प्री-फेब्रिकेशन मॉडल के तहत स्कूल, आगंनबाड़ी, उप स्वास्थ्य केन्द्र एवं सामुदायिक भवन बनाने तथा सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युत व्यवस्था संचालन करने को निर्देश अधिकारियों को दिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से उनके कृषि के अलावा कुक्कुट, मत्स्य, पशुपालन जैसे रोजगारपरक व्यवसायों को अपनाने पर हरसंभव विभागीय मदद देने की बात कही। ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं की मांग की ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पेयजल की समस्या के साथ-साथ सड़क निर्माण की आवश्यकता, पक्के आंगनबाड़ी, स्कूल, अस्पताल, विद्युत व्यवस्था जैसी आवश्यकताएं प्रमुखता से उठाई। इस पर कलेक्टर ध्रुव ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए नरेगा के माध्यम से पेयजल के लिए गांव में कुआं खोदने, सड़क निर्माण के लिए पहाड़ियों की पगडंडियों के चौड़ीकरण एवं समतलीकरण किए जाने की बात कही, ताकि दुपहिया एवं साइकिल जैसे आवागमन के साधन आसानी से चलाये जा सकें।


