वन अधिकार कानून में बदलाव का विरोध,आदिवासियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन:कई जिलों में आंदोलन,गरियाबंद में बारिश में निकाली 5 किमी रैली, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ में वन विभाग द्वारा वनाधिकार कानून (FRA 2006) और ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने के प्रयास के खिलाफ प्रदेशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। 2 जुलाई 2025 को राज्य के कई जिलों नगरी (धमतरी), अंबिकापुर, नारायणपुर, कांकेर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, गरियाबंद, पिथौरा (महासमुंद), बालोद और बस्तर में ग्रामसभा प्रतिनिधियों, आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर संबंधित जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। विरोध का कारण 15 मई 2025 को वन विभाग द्वारा जारी वह आदेश है, जिसमें विभाग ने स्वयं को FRA का नोडल एजेंसी घोषित करने की कोशिश की है, जिसे आदिवासी संगठनों ने असंवैधानिक और आदिवासी विकास विभाग के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बताया है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि इस आदेश से ग्रामसभाओं की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजनाएं अमान्य हो जाएंगी और खनन, ग्रीन एनर्जी, कार्बन क्रेडिट जैसी परियोजनाएं ग्रामसभा की सहमति के बिना थोपे जाने का रास्ता खुल जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए और आदिवासी विकास विभाग को ही FRA का नोडल विभाग घोषित किया जाए। संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो राज्यभर में जन-जागरण अभियान, सत्याग्रह और विधानसभा घेराव जैसे बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। गरियाबंद में सैकड़ों आदिवासियों ने बारिश में निकाली 5 किमी रैली इधर, गरियाबंद में आदिवासी समाज ने वन अधिकार नियमों में किए गए बदलाव का विरोध किया है। आदिवासी विकास परिषद, ग्राम सभा फेडरेशन और एकता परिषद के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम और संजय नेताम के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासियों ने मजरकट्टा स्थित परिषद भवन से कलेक्टोरेट तक बारिश में पैदल मार्च किया। वन मंत्रालय ने 15 मई 2025 को एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत वन अधिकार मान्यता और सामुदायिक वन संसाधन के उपयोग से जुड़े फैसले लेने का अधिकार वन विभाग को दिया गया है। जबकि 2006 के वन अधिकार कानून के अनुसार यह अधिकार ग्राम सभा को था, जिस पर आदिवासी विकास विभाग की निगरानी थी। नेताओं की चेतावनी, एक सप्ताह में मांगें नहीं मानी गईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन आदिवासी नेताओं ने कहा कि नए प्रावधान में केवल वन के हित को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि कानून में बदलाव का अधिकार किसने दिया। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर एक सप्ताह में मांगें नहीं मानी गई तो प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और वन अधिकार नियमों को पहले की तरह बनाए रखने की मांग की।

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