वन फेनोलॉजी में जंगल की वनस्पतियों की तस्वीर ले डेटा उपलब्ध कराएगा, चेतावनी संकेतों को पहचानेगा

वन पारिस्थितिकी तंत्र में मौसमी बदलावों की निगरानी को वैज्ञानिक आधार पर सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, हैदराबाद, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा और झारखंड वन विभाग के बीच मंगलवार को बीआईटी मेसरा परिसर में त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इस समझौते के तहत झारखंड में फेनोकैम-आधारित वन फेनोलॉजी मॉनिटरिंग प्रोग्राम की शुरुआत की जाएगी, जिसमें उपग्रह डेटा और ग्राउंड-बेस्ड फेनोकैम तकनीक को जोड़ा जाएगा। फेनोकैम एक स्थायी डिजिटल कैमरा प्रणाली है, जिसे वनों में स्थापित किया जाता है। यह वनस्पति की लगातार छवियां कैप्चर करता है और पत्तों का उगना, फूलों का खिलना व झड़ना जैसे मौसमी बदलाव दर्ज करता है। जब इसे उपग्रह रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ जोड़ा जाता है, तो यह वन स्वास्थ्य का सटीक आकलन करने, उपग्रह डेटा का स्थलीय सत्यापन करने और वन क्षेत्र में जलवायु से जुड़ी प्रारंभिक चेतावनी संकेतों की पहचान में सहायक होता है। इस पहल से पारिस्थितिकी संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा इस परियोजना से जलवायु अनुसंधान, कार्बन उत्सर्जन विश्लेषण व जैव विविधता संरक्षण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल झारखंड में पारिस्थितिकी संरक्षण और स्थिरता की दिशा में काम करेगा। समझौते का आदान प्रदान जिला वन पदाधिकारी हजारीबाग सूरज सिंह, एनआरएससी वैज्ञानिक डॉ. सुदीप दास के बीच हुआ। मौके पर रिमोट सेंसिंग व जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के डॉ. वीएस राठौड़, एनआरएससी के डॉ. नीरज प्रियदर्शी, इसरो के डॉ. गिरीश पुजार, बीआईटी के कुलपति मौजूद थे। बीआईटी मेसरा, एनआरएससी हैदराबाद व झारखंड वन विभाग के बीच फॉरेस्ट फेनोलॉजी मॉनिटरिंग पर एमओयू

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