‘वन बचेंगे तो हम बचेंगे’:अनुभूति शिविर में छात्रों ने लिया प्रकृति रक्षा का संकल्प

मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के बैनर तले वन विभाग की बहुउद्देशीय योजना “हम हैं धरती के दूत” की थीम पर अनुभूति कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत दक्षिण वन परिक्षेत्र, गुना द्वारा मकरावदा बांध पर दो दिवसीय अनुभूति शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नवोदय विद्यालय एवं उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र-छात्राओं को वन, वन्य-प्राणी और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब ले जाकर संरक्षण की अनुभूति कराई गई और पर्यावरण बचाने का संकल्प भी दिलाया गया। शिविर के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय कार्यवाह अशोक अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि एकल प्रभाग पी-7 के जागरण शिक्षा प्रभारी विकास जैन नखराली उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़कर प्रकृति की रक्षा करने का आह्वान किया। पंच परिवर्तन पर दिया गया जोर अशोक अग्रवाल ने विद्यार्थियों को पंच परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि इसके पांच आयामों में पर्यावरण जागरूकता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कम उम्र से ही बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित होना जरूरी है। साथ ही युवाओं से अनुशासन और देशभक्ति के साथ समाज व देश के लिए सकारात्मक कार्य करने की अपील की। जन्मदिन पर पौधारोपण का संदेश जागरण शिक्षा प्रभारी विकास जैन ने युवाओं से अपने जन्मदिन पर पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वन हमारी जीवन रेखा हैं, क्योंकि यही हमें ऑक्सीजन, पानी और भोजन उपलब्ध कराते हैं। मास्टर ट्रेनर विष्णु वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को बांध के आसपास जंगल भ्रमण कराते हुए विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, उनके औषधीय और वाणिज्यिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने दीमक और मधुमक्खी जैसे छोटे जीवों से लेकर बड़े वन्य प्राणियों तक की जैव विविधता के महत्व को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान नेचर ट्रेल के बाद वन सुरक्षा जागरूकता से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा शील्ड और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी हेमंत भार्गव ने बताया कि हर वर्ष ऐसे अनुभूति शिविरों का आयोजन किया जाता है, ताकि बच्चों में कम उम्र से ही पर्यावरण, वन और वन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके। कार्यक्रम का संचालन हरीश भार्गव ने किया, जबकि आभार शिवम् उपाध्याय ने व्यक्त किया। इस अवसर पर पूजा फाल्के द्वारा बनाई गई वन दर्शन आधारित रंगोली भी आकर्षण का केंद्र रही।

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