इंदौर वन मंडल में बुधवार से ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन 2026 की शुरुआत में गुरुवार को पहले दिन वन अमले ने 103 वन बीटों में गहन जमीनी सर्वे किया। विभाग को शुरुआती निष्कर्षों में 21 बीटों में बाघों के संकेत और 74 बीटों में तेंदुओं की मौजूदगी मिली है। जिससे इंदौर वन मंडल में तेंदुओं की मजबूत उपस्थिति और बाघों की सीमित लेकिन महत्त्वपूर्ण गतिविधि सामने आई है। इंदौर वन मंडल सर्वे में पहले दिन चोरल वन क्षेत्र सबसे अधिक सक्रिय पाया गया। यहां कुल 33 बीटें हैं, जिनमें से 18 बीटों में बाघों के संकेत और सभी 33 बीटों में तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्र अब भी बड़े वन क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर बना हुआ है। इसी तरह इंदौर रेंज जो 26 बीटों में फैली है, में एक बीट में बाघों के संकेत और 15 बीटों में तेंदुओं की गतिविधि पाई गई, जो मुख्यतः वन किनारों और मानव गतिविधि वाले इलाकों के आसपास रही। वहीं महू रेंज की 20 बीटों में से दो बीटों में बाघों की हलचल और 15 बीटों में तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई। राष्ट्रीय रिपोर्ट वर्ष 2026 में जारी होने की संभावना है। बाघ के नहीं तेंदुए के मिले निशान मानपुर रेंज जिसमें 23 बीटें हैं, में पहले दिन बाघों के कोई संकेत नहीं मिले, लेकिन 10 बीटों में तेंदुओं के संकेत पाए गए। रालामंडल अभयारण्य, जो केवल एक बीट में फैला है, वहां तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई, जबकि बाघों के कोई प्रमाण नहीं मिले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र में पहले दिन बाघों के संकेत न मिलना उनकी अनुपस्थिति का प्रमाण नहीं है, क्योंकि फेज-1 सर्वे कई दिनों में जुटाए गए अप्रत्यक्ष साक्ष्यों पर आधारित होता है। 4 चरणों में पूरी होती है राष्ट्रीय गणना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा हर चार वर्ष में कराई जाने वाली यह गणना चार चरणों में पूरी होती है। फेज-1 में जमीनी सर्वे – बाघ, तेंदू, शिकार प्रजातियों और आवास की स्थिति का आकलन। फेज-2 में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस– वन क्षेत्र, कॉरिडोर और विखंडन का मानचित्रण। फेज-3 में कैमरा ट्रैपिंग कैमरा ट्रैप के जरिए कैप्चर–रिकैप्चर विश्लेषण। फेज-4 में राष्ट्रीय सांख्यिकीय विश्लेषण सभी राज्यों के आंकड़ों का समेकन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करना। तैयारी और तकनीकी सहयोग इंदौर वन मंडल के डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पहले दिन के आंकड़े मजबूत फील्ड कार्य का संकेत देते हैं। फेज-1 पूरी गणना की नींव है। हमारी टीमें हर बीट को व्यवस्थित रूप से कवर कर रही हैं ताकि इंदौर से जाने वाला डेटा पूरी तरह सटीक और वैज्ञानिक हो। इंदौर वन मंडल में यह जमीनी सर्वे आने वाले दिनों तक जारी रहेगा, जिसके बाद कैमरा ट्रैपिंग और आगे के चरणों से पहले वन्यजीवों की आवाजाही, शिकार की उपलब्धता और आवास की स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।


