भास्कर न्यूज | गिरिडीह ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत गिरिडीह जिले के पूर्वी वन प्रमंडल क्षेत्र में खाली पड़ी वनभूमि पर एक लाख फलदार पौधा लगेगा। इसकी तैयारी में वन िवभाग जुट गया है। इस योजना का खास पहलू ये है िक इसमें िसर्फ फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इसमें छोटे पौधे नहीं बल्कि 5-6 फीट के पौधे लगाए जाएंगे। ताकि, कम समय में वह पेड़ का रूप ले सके। इसके तहत सारे पौधे फलदार, छायादार और औषधीय गुणों वाले होंगे। इसके लिए पूर्वी वन प्रमंडल के बेलाटांड़, चितनखारी, मरगोड़ा, तिग्गोजोरी, बगदाहा और खूंटा गांवों में खाली पड़े वन भूमि को चयनित िकया गया है, जहां पौधरोपण के िलए पिट तैयार कर िलया गया है। पौधरोपण के बाद उसकी सुरक्षा के लिए कंटीले तार से पूरे पैच की घेराबंदी की जाएगी। इसमें कम से कम पांच हेक्टेयर में फैली भूमि में एक पैच का निर्माण करना है। ताकि, पौधरोपण के बाद वनों का घनत्व तेजी से बढ़े और उसका लाभ कम समय में ग्राम वासियों को मिलने लगे। इस तरह का पहला प्रयोग गिरिडीह जिले में होने जा रहा है। इससे पूर्व वन विभाग की ओर से हर वर्ष छोटे-छोटे पौधे लगाए जाते थे, जिन्हें पेड़ बनने में काफी वक्त लग जाता था, लेकिन ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत लगने वाले बड़े पौधों का लाभ जल्द ही लोगों को नजर आने लगेगा। बता दें िक गिरिडीह राज्य का पहला िजला है जहां इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी है। जुलाई मंे होगी शुरुआत: जुलाई माह में होने वाले बारिश के बीच एक लाख िपट में पौधरोपण का काम शुरू हो जाएगा। करीब एक माह का वक्त पौधा रोपण के साथ उसकी घेराबंदी में लगेगी। इसे लेकर रेंज ऑफिसर एसके रवि ने बताया कि भारत सरकार ने यह योजना वर्ष 2023 मंे शुरू किया था। पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष कुमार तिवारी के प्रयास से राज्य का पहला जिला गिरिडीह है, िजसे इस बार लिया गया है। जहां पर योजना को धरातल में उतारा जा रहा है। इस योजना में लगे पौधों के रख-रखाव में बहुत कम खर्च आने की संभावना है। इसमें एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगाए जाएंगे। योजना से खाली वन भूमि में लौटेगी हरियाली : डीएफओ पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार तिवारी ने कहा कि ग्रीन क्रेडिट योजना भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से पूरे देश में चलाया जा रहा है। इसी के तहत इस बार गिरिडीह जिले का चयन हुआ है। जिसे लेकर पूर्वी वन प्रमंडल मंे काम भी शुरू हो गया है। यह अपने आप की अनोखी योजना है, जिसके तहत बड़े पौधे लगेंगे। जिसके रख-रखाव में वन कर्मियों को अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। इसकी सुरक्षा में ग्रामीणों को भी अपना योगदान देना होगा। इसे खाली पड़े वन भूमि पर फिर से हरियाली लौटेगी।


