भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर शासकीय गर्ल्स कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग ने सतत ग्रामीण विकास में वन उत्पाद की भूमिका विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया। इस व्याख्यान माला में विभिन्न कॉलेज के प्राध्यापकों ने अपने-अपने विचार रखे और कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वालित कर किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रंजना नीलिमा कच्छप ने सतत ग्रामीण विकास में वनों उत्पाद विषय की भूमिका के संबंध में जानकारी दी। इस व्याख्यान माला में वाड्रफनगर से अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष और प्रभारी प्राचार्य सुधीर सिंह ने बताया कि वनोपज से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संचालन होता है। वनों में इतनी संपदा है, जिसके एकत्रीकरण से लेकर बाजार में पहुंचाने तक की जिम्मेदारी ग्रामीण निभाते हैं। अब तक उन्हें बाजार में वन उत्पाद से पर्याप्त और उचित दाम नहीं मिल रहे थे, लेकिन सरकारी कोशिशों के बाद अब वनोपज की अच्छी कीमत में मिलने स ग्रामीण आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। वनों में कई तरह की वन संपदा है, जैसे जड़ी-बूटी और फल, जिनका उत्पादन अलग-अलग सीजन में होता है। प्रकृति के चक्र के अनुसार बारह महीने कुछ ने कुछ उत्पाद निकलते हैं, जो ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था को चलाने पर्याप्त होते हैं। अन्य वक्ताओं ने बताया कि गर्मी के सीजन में तेंदू पत्ता, चार, तेंदु, महुआ जैसे उत्पाद मिलते हैं। इनमें से कुछ उत्पादों के लिए सरकार ने एमएसपी तय कर रखी है, लेकिन बाजार में अच्छे दाम मिलने पर ग्रामीण बाजार में ही बेच देते है। कार्यक्रम को सफल बनाने कनकलता पैकरा, समा बेगम, विनय गुप्ता, सुमित मिश्रा, डॉ. ज्ञानचन्द्र पाल, सविता पैकरा, मो. अमजद, अनिल देव, विजय कुमार, ऋचा चेलकर, कुलदीप सिंह, दीप्ति केरकेट्टा, संगीता पैकरा समेत कालेज स्टॉफ सक्रिय रहे। वनोपज से आय बढ़ाने की जानकारी दी डॉ. बलराम साहू ने वनों व पशु पक्षियों को संरक्षित करने की बात कही तो डॉ. पवन कुमार उपाध्याय ने मंच संचालन करते हुए छात्राओं को सतत ग्रामीण विकास में वन की क्या भूमिका है और वनों को कैसे संरक्षित किया जाए और वनों से कैसे आय को बढ़ाया जाए, इसके बारे में बताया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।


