भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में वर्ष 2015 के बाद 2025 में शिक्षकों की बहाली हुई। बावजूद पहली से आठवीं कक्षा में 2101 शिक्षकों का पद रिक्त रह गया। वहीं 68 प्रतिशत शिक्षक नहीं हैं। जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कुल 1292 विद्यालयों में 3705 शिक्षकों की स्वीकृत पद हैं। जिसमें 419 सहायक आर्चायों की नियुक्ति के बाद 1604 शिक्षक ही कार्यरत हैं। छठी से आठवीं कक्षा में मुख्य विषय विज्ञान, भाषा व सामाजिक विज्ञान विषय के लिए 145-145 पद स्वीकृत है। जिसमें विज्ञान में 100, भाषा में 86 व सामाजिक विज्ञान में 80 शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं पहली से पांचवीं कक्षा के लिए इंटर प्रशिक्षित शिक्षकों की 957 पद स्वीकृत है, जिसमें 860 शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 2025 में छठीं से आठवीं कक्षा में 200 व पहली से पांचवीं कक्षा में 219 सहायक आचार्यों की नियुक्ति की गई है। विषयवार शिक्षक होने चाहिए : छात्रा : राजकीय मध्य विद्यालय कि आठवीं कक्षा कि छात्रा शीतल कुमारी ने बताया कि मेरे विद्यालय में इंग्लिश और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक नहीं है। जिसके कारण विद्यालय के अन्य शिक्षक ही इन विषयों की पढ़ाई कराते हैं। विषयवार शिक्षक होने से विद्यार्थियों को पढ़ने में आसानी होती। गढ़वा, मध्य विद्यालय। सामाजिक विज्ञान व इंग्लिश के शिक्षक नहीं राजकीय मध्य विद्यालय बंशीधर नगर के आठवीं के छात्र आकाश कुमार ने बताया कि दो विषयों के शिक्षक नहीं है। जिसके कारण विद्यालय के शिक्षक से ही उन विषयों पर बातचीत कर लेते हैं। यदि शिक्षक रहते तो हम लोगों कि पढ़ाई सामाजिक विज्ञान और इंग्लिश विषयों कि पढ़ाई नियमित होती रहती है। परीक्षाफल हो रहा है प्रभावित सेवा निवृत्त प्रधानाध्यापक सह झारखंड रत्न से सम्मानित रेयाज अहमद ने कहा कि शिक्षकों के कमी से परीक्षाफल पूरी तरह से प्रभावित होता है। विद्यालय की अन्य गतिविधियां भी प्रभावित होती है। कक्षा में शिक्षक नहीं होने से विद्यालय की अनुशासन भी प्रभावित होता है। क्योंकि बच्चे क्लास रूम से बाहर निकलने लगते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक से लेकर अन्य शिक्षक भी परेशान रहते हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि समय समय पर विभागीय समीक्षा होती रहती है। जिसमें जिले में शिक्षकों की स्थिति के बारे में पत्राचार किया जाता है। सरकार की ओर से समय समय पर बहाली भी की जाती है।


