वसंत पंचमी पर सोमवार को अखाड़ों ने अमृत स्नान किया। संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर उमड़ी। देशभर के प्रमुख संतों ने भव्य व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा- वसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। हमारा सामाजिक सद्भाव, आध्यात्मिक मूल्य आज पूरे विश्व के केंद्र में हैं। योग और आयुर्वेद के माध्यम से भारत की अद्भुत स्वीकृति बढ़ रही है। हम वही हैं जो पूरे संसार को अपना परिवार मानते हैं। हम यह भी चाहते हैं कि अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं और प्लास्टिक का उपयोग न किया जाए। कैलाशानंद गिरी बोले- धर्म को योगी से बेहतर कोई नहीं समझ सकता
आचार्य महामंडलेश्वर और निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा- आज वसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। सभी सनातनी आज मां सरस्वती की आराधना करेंगे। सभी अखाड़े पवित्र स्नान कर रहे हैं। कोई भी सरकार इस परंपरा को तभी समझ सकती है जब सरकार में कोई धर्म को समझने वाला हो। धर्म को योगी से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। स्वामी बालिकानंद बोले- सभी को अमृत स्नान का लाभ मिले
आनंद अखाड़े के आचार्य स्वामी बालिकानंद गिरी ने कहा- अमृत स्नान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में बहुत भाव और दिव्या तैयारी की है। शासन और प्रशासन की ओर से भी पूरा सहयोग किया गया है। पूरी दिव्यता के साथ अमृत स्नान संपन्न हो रहा है। समस्त अखाड़े अपने-अपने समय के अनुसार त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा रहे हैं। सभी को अमृत स्नान का लाभ मिलेगा। रविंद्र पुरी बोले- अमृत स्नान के बाद वाराणसी के लिए प्रस्थान करेंगे
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा- आज वसंत पंचमी के अवसर पर अंतिम ‘अमृत स्नान’ है। ‘अमृत स्नान’ के बाद हम वाराणसी के लिए प्रस्थान करेंगे। हमें स्नान के लिए 40 मिनट का समय दिया गया है। सभी श्रद्धालुओं से आग्रह करता हूं कि बिना आवश्यक कारण संगम घाट न आएं। एकता, समृद्धि और भाईचारे की भावना बनी रहे
अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने कहा- अमृत स्नान बहुत शांतिपूर्वक और उत्कृष्ट तरीके से संपन्न हुआ। इस कुंभ मेला का उद्देश्य विश्व में शांति और एकता स्थापित करना है। सभी को इससे एक सीख लेनी चाहिए। यहां सभी जाति और धर्म के लोग एकत्रित होते हैं। एकता, समृद्धि और भाईचारे की भावना बनी रहे। महाकुंभ स्वयं ही अमृत स्नान है
निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरी महाराज ने कहा- महाकुंभ स्वयं ही अमृत स्नान है। मुगल शासन के दौरान जिसे शाही स्नान कहा जाता था, आज वैदिक संस्कृति में उसे अमृत स्नान के नाम से जाना जाता है। गंगा मात्र दर्शन से ही पापों से मुक्त करने की क्षमता रखती है। हम यहां त्रिवेणी में उपस्थित हैं। श्रद्धालुओं को सभी का ध्यान रखना चाहिए
आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने कहा- आज वसंत पंचमी के अवसर पर ‘अमृत स्नान’ हो रहा है। मुझे नहीं लगता कि इससे पहले कभी कुंभ में इतनी बड़ी संख्या में लोग आए होंगे। बच्चों और बुजुर्गों को पहले स्नान कराया जाना चाहिए। श्रद्धालुओं को सभी का ध्यान रखना चाहिए। मैं युवाओं से भी आग्रह करता हूं कि वे सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करें। महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा- आज का स्नान पूरे विश्व के कल्याण के लिए प्रार्थना करने का अवसर है। यहां सभी प्रकार के लोग आए हैं। प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम उत्कृष्ट हैं।


