वामपंथी दलों का जयपुर में प्रदर्शन:केंद्र और राज्य के जनविरोधी बजट का विरोध, वैकल्पिक बजट मांगपत्र पेश

जयपुर में वामपंथी-जनतांत्रिक दलों ने शुक्रवार को खासा कोठी चौराहे पर केंद्र और राज्य सरकार के बजट के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय आह्वान पर राज्यव्यापी अभियान के तहत आयोजित किया गया। प्रदर्शन में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले), समाजवादी पार्टी और अन्य जनवादी-वामपंथी संगठन शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ऑप्शनल बजट मांगपत्र भी प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने सरकार के जनविरोधी बजट प्रस्तावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बजट में आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही रोजगार के अवसर और मजदूरी बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार और राज्य सरकार केवल देशी-विदेशी कॉर्पोरेट्स और पूर्व राजे-रजवाड़ों के हितों को साध रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। वक्ताओं ने इन सभी मांगों को वित्त विधेयक में शामिल करने की मांग की। प्रदर्शन में निम्नलिखित ऑप्शनल बजट मांगपत्र रखा गया देश के 200 डालर अरबपतियों पर 4 फीसद संपदा कर लगाया जाए। कारपोरेट टैक्स बढ़ाया जाए। कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए और नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग के मसौदे को वापस लिया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के राष्ट्रीय मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन के जरिए निजी क्षेत्र के हवाले किए जाने को रोका जाए। बीमा क्षेत्र में 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को वापस लिया जाए। मनरेगा के आवंटन में 50 फीसद बढ़ोतरी की जाए। देश में शहरी रोजगार गारंटी कानून लाया जाए। राज्य के पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लागू किये गये शहरी रोजगार गारंटी कानून को लागू किया जाये और उसका विस्तार किया जाये। वृद्धावस्था पेंशनों और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए केन्द्र सरकार से प्रावधान को बढ़ाया जाए। स्वास्थ्य के लिए आवंटन बढ़ाकर जीडीपी का 3 फीसद और शिक्षा के लिए आवंटन जीडीपी का 6 फीसद किया जाए। खाद्य सब्सिडी को बढ़ाया जाए ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा सके। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सैक्टर के लिए और महिलाओं तथा बच्चों के विकास के लिए, आबंटन में उल्लेखनीय समुचित बढ़ोतरी की जाए, जिसमें आइसीडीएस के लिए आवंटन बढ़ाना भी शामिल है। योजना कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी की जाये और इसमें केंद्र का हिस्सा बढ़ाया जाए। राज्यों के लिए फंडों के हस्तांतरण और केंद्र-प्रायोजित योजनाओं के लिए फंडों में उल्लेखनीय रूप से समुचित बढ़ोतरी की जाए। पैट्रोलियम उत्पादों पर उन महसूलों और सरचार्जों को निरस्त किया जाए, जो राज्यों के साथ बंटवारे के लिए, विभाज्य पूल में नहीं आते हैं। विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि जब तक वित्त विधेयक के जरिए बजट को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं कर लिया जाता है, तब तक वामपंथी-जनतांत्रिक पार्टियां उक्त मांगों/ प्रस्तावों को बजट में जोड़े जाने के लिए जनता के बीच अभियान चलाती रहेंगी। इन प्रस्तावों के पक्ष में जनता को गोलबंद करने के लिए यह अभियान चलाने के दौरान घर-घर जाकर अभियान, नुक्कड़ सभा प्रदर्शनों तथा रैलियों के जरिए, ज्यादा ज्यादा संख्या में लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। आज के प्रदर्शन को सीपीआई(एम) के राज्य सचिव का.किशन पारीक, सीपीआई के राज्य सचिव का.नरेन्द्र आचार्य, सीपीआई(एम) जयपुर जिला सचिव डॉ.संजय “माधव”, सीपीआई(एम.एल.) जिला सचिव का. मंजूलता, समाजवादी पार्टी के राज्य महासचिव विनोद यादव , सीटू के वरिष्ठ नेता का.रविन्द्र शुक्ला, एप्वा की उषा यादव, एटक के का. कुणाल रावत, कैलाश गहलोत, भारत की जनवादी नौजवान सभा के रितांश आजाद , एसएफआई के नरपत सिंह भारती आदि वक्ताओं ने संबोधित किया।

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