वाराणसी कलेक्ट्रेट गेट पर होमगार्ड ने वकील को पीटा:महिला को बताया था वकील का पता, ADM-ACP के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी

वाराणसी कलेक्ट्रेट के गेट पर सोमवार को वकील और होमगार्ड में मारपीट हो गई। दोनों ने पहले एक-दूसरे को गाली दी। फिर होमगार्ड ने वकील को लात-घूसों से पीट दिया। इसके बाद वकीलों की भीड़ जमा हुई तो होमगार्ड गेट पर गार्ड रूम में घुस गए। उन्होंने गार्ड रूम में घुसकर होमगार्डों की पिटाई कर दी। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों की बात जानी। फिर वकीलों के दबाव में होमगार्डों ने माफी मांगी। हंगामा करते हुए वकीलों ने पुलिस को शिकायत दी, जिसमें होमगार्ड पर हमले का आरोप लगाया है। हालांकि अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है। पहले मारपीट की 2 तस्वीरें देखिए… होमगार्ड ने महिला को वकील के बारे में बताया था
एक महिला ने होमगार्ड से किसी वकील के बारे में पूछा। होमगार्ड को बताया-वकील ने एक हजार रुपए लेकर भी काम नहीं करवाया। होमगार्ड ने उसे वकील की मौजूदगी बता दी। जिसके कुछ देर बार वकील भी गेट पर पहुंच गया। होमगार्ड नित्यानंद से नोकझोंक हो गई। विवाद में दोनों के बीच गाली गलौज और मारपीट शुरू हो गई। उसके साथी होमगार्ड ने वकील को पीट दिया, इसके बाद मामला बढ़ गया। कुछ देर बाद वकील ने अपने साथियों को बुला लिया। मामला बढ़ता देखकर होमगार्ड गार्ड रूम में घुस गए। वकीलों ने उन्हें पीट दिया। हालांकि अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद होमगार्डों ने माफी मांगी। मंगलेश दुबे बोले-मामले की जांच होगी
सेन्ट्रल बार एसोसिएशन वाराणसी के अध्यक्ष मंगलेश दुबे ने बताया-कलेक्ट्रेट में अधिवक्तागण और पुलिसकर्मियों के बीच आपसी विवाद के वीडियो का संज्ञान लिया गया। वीडियो देखने के बाद पूर्व अध्यक्ष दी सेन्ट्रल बार एसोसिएशन वाराणसी अशोक कुमार सिंह उर्फ प्रिन्स की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया। जिसकी रिपोर्ट 24 फरवरी को देनी होगी। वहीं, SP कैंट विदुष सक्सेना ने बताया कि वकीलों और होमगार्ड में मारपीट होने की सूचना पर मौके पर पहुंचा था। घायल का मेडिकल कराया गया है। अधिवक्ताओं की ओर से शिकायत मिली है, घटना की जांच की जा रही है। ———————— ये खबर भी पढ़िए… मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO; मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी मैं 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं। बचपन में मां अपने बगल में मुझे बैठाकर गीता और भागवत पुराण आदि सुनाने को कहती थीं। पढ़ाई के बाद एक इंटरनेशनल कंपनी में मैनेजर बन गई, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया और संन्यास की तरफ बढ़ गई। यह कहना है श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि का। पढ़िए पूरी खबर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *