भास्कर न्यूज | अमृतसर सफाई मजदूर फेडरेशन पंजाब ने वार्ड-49 में प्राइवेट सफाई कर्मी तैनात करने और ड्यूटी पर समय से न आने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह आरोप पार्षद रितु कुंद्रा के पति सनी कुंद्रा द्वारा लगाए गए थे। उन्होंने सेनेटरी इंस्पेक्टर राजन का रजिस्टर चेक किया था, जिसमें 29 अप्रैल से 4 मई तक सफाई कर्मियों की अटेंडेंस नहीं पाई गई थी। साथ ही निजी व्यक्तियों से सफाई करवाने का आरोप भी लगाया गया था। अब यूनियन नेताओं विनोद बिट्टा और सुरिंदर टोना ने बयान जारी कर कहा कि किसी पार्षद पति को रजिस्टर चेक करने का अधिकार नहीं है। यदि पार्षद को कोई जानकारी लेनी हो, तो हेल्थ अफसर की मौजूदगी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी कभी काम से पीछे नहीं हटे। पहले 1800 कर्मचारी थे, अब 1300 बचे हैं, जबकि कॉलोनियों की संख्या बढ़ चुकी है। यूनियन कई बार सरकारी भर्ती की मांग उठा चुकी है, लेकिन न तो हाउस में मता पास कराया गया और न ही सरकार कोई ठोस कदम उठा रही है। यूनियन का कहना है कि कई बार सफाई कर्मी की तबीयत खराब हो सकती है या कोई निजी समस्या आ सकती है, लेकिन ऐसे हालातों की कोई सुनवाई नहीं होती। सफाई सेवकों की ड्यूटी सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक होती है। पहले एक सेनेटरी इंस्पेक्टर को गालियां दी गईं, तो वह चुपचाप चला गया। जिस तरह से पार्षद पति बोल रहे हैं, उसकी वीडियो देखी जा सकती है। यूनियन का साफ कहना है कि इस तरह के दबाव में काम नहीं किया जाएगा। एक वार्ड में तो काम रोक ही दिया गया है, जरूरत पड़ी तो पूरे शहर की सफाई ठप्प कर दी जाएगी। यूनियन ने कहा कि जब मर्जी हो चेक कर लें, कोई गैरहाजिर नहीं मिलेगा। 9300 रुपए में आउटसोर्स कर्मियों से काम लेने की सोच गलत है। सरकारी भर्ती क्यों नहीं की जा रही? 30 साल से महिला और पुरुष सफाई कर्मियों को 3400-3700 रुपए सालाना वर्दी भत्ता ही मिलता है। काम बढ़ा है तो वेतन भी बढ़ना चाहिए और समय पर मिलना चाहिए। काउंसलरों की जिम्मेदारी बनती है कि वे सफाई कर्मियों के हित में प्रस्ताव पास कराएं। जब शहर सोता है, सफाई कर्मचारी काम पर होते हैं, लेकिन उनकी मेहनत किसी को नहीं दिखती। सेनेटरी इंस्पेक्टर और पार्षद के बीच विवाद से शहर को नुकसान होगा। यदि निगम कमिश्नर से मीटिंग कर मसला हल नहीं कराया गया, तो 72 घंटे का अल्टीमेटम देकर सफाई कार्य पूरी तरह से ठप्प किया जाएगा। पार्षद की अथॉरिटी पर जांच कर सकते हैं : कुंद्रा पार्षद पति सनी कुंद्रा ने कहा कि जैसे अफसरों की अथॉरिटी होती है, वैसे ही पार्षदों और विधायकों की भी होती है। अगर सब कुछ सही है, तो रजिस्टर चेक करवाने में क्या दिक्कत है? हर वार्ड में सीसीटीवी लगे हैं, चेक करवा लें कि कौन लोग सफाई कर रहे हैं – सरकारी कर्मचारी हैं या प्राइवेट। अगर सफाईकर्मी समय पर ड्यूटी पर नहीं आ रहे तो सवाल तो उठेंगे ही। उन्होंने कहा कि निगम और हेल्थ अफसरों ने काम शुरू कराने का भरोसा दिया था, लेकिन सफाई का काम ठप्प रहा। यदि सेनेटरी या चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टरों के अलावा कोई गड़बड़ी करता है, तो उस पर सवाल उठाना हर नागरिक का हक है। अगर प्राइवेट बंदे काम पर आ रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते? जिन अफसरों की ड्यूटी है, वे खुद सुबह और दोपहर में वार्डों का निरीक्षण क्यों नहीं करते?


