ट्रस्ट का आरोप- रणजीत एवेन्यू में बूथ-91 पर अवैध कब्जा, खाली कराने पहुंचे तो मालिक ने किया हंगामा

भास्कर न्यूज | अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन करमजीत सिंह रिंटू के निर्देश पर रणजीत एवेन्यू बूथ नंबर-91 में अवैध कब्जा छुड़ाने के लिए टीम दोपहर करीब ढाई बचे पहुंची। एक्सईएन अमनदीप सिंह ने बताया कि अवैध कब्जा खाली कराने के लिए दोपहर करीब ढाई बजे पहुंचे थे, लेकिन मालिक और उनके लोगों ने बवाल कारना शुरू कर दिया। ट्रस्ट को अपनी कार्रवाई नहीं करने दी, जबकि सरकार ने 2018 में इस बूथ को जब्त करने का आदेश दिया हुआ है। वहीं मालिक ने बताया कि करीब 6 किस्तों में 8 लाख रुपए ट्रस्ट को इस बूथ का दे चुके हैं। फैमिली डिस्प्यूट के कारण 3-4 किस्तों की ड्यूटी नहीं जमा करा सके। बूथ का अलॉटमेंट 2001 में उनकी माता, ताया और चाची के नाम से हुआ था। पैसे देने को तैयार हैं, लेकिन ट्रस्ट ले नहीं रहा। सरकार की जगह पर क्यों कब्जा करेंगे। सारी शर्तें मानने को तैयार हैं। ब्याज सहित भुगतान करेंगे। फिलहाल ट्रस्ट की टीम को विरोध के बाद बैरंग वापस लौटना पड़ा। एक्सईएन ने बताया कि साल 2001 में यह बूथ अलॉट हुआ था, लेकिन इन्होंने किराया जमा नहीं कराया तो ट्रस्ट ने जब्त करने के लिए साल 20018 में मता पास कर सरकार को भेज दिया था। इस बूथ को जब्त करने के लिए सरकार ने अपनी मंजूरी दे चुकी है। जब सरकार से जब्त करने की अप्रूवल मिल गई तो बकाया जैसा कुछ नहीं रहता है। प्रॉपर्टी ट्रस्ट के हक में आ जाती है। पवनदीप तो इस बूथ का ऑनर भी नहीं है। जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। जिसमें ताला लगाने टीम गई थी, तो बहसबाजी पर उतर आए। हालांकि ट्रस्ट की टीम वापस लौट आई। चेयरमैन को इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। ^कब्जा लेने के लिए प्रोसीजर फॉलो करना होता है। लेकिन ट्रस्ट ने बूथ पर अपना कब्जा लेने के लिए ना तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट साथ में लिया और ना ही पुलिस फोर्स की मदद। खुद ही अपने स्तर पर अफसर कार्रवाई करने पहुंच गए। वहीं सरकार ने लोगों को यह राहत दी है कि किस्तें टूटने पर वन टाइम सेटलमेंट कर सकते हैं। इसका लाभ 31 दिसंबर 2025 से तक उठाया जा सकता है। ट्रस्ट को इस स्कीम का ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाकर लोगों को राहत दिलाना चाहिए। -मनीष परासर, सीनियर एडवोकेट ^ट्रस्ट का चेयरमैन बनने से पहले ही यह प्राथमिकता है कि अवैध कब्जे वाली जगहों को खाली करवाएंगे। यदि अवैध निर्माण हो रहा तो रोका जाएगा। यदि टीम के साथ कोई उलझता है और समझाने पर भी नहीं मानता तो कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखेंगे। एक्शन को लेकर जो भी प्रोसीडिंग बनती है, उस मुताबिक काम किया जा रहा है। -करमजीत सिंह रिंटू, चेयरमैन, ट्रस्ट

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