राज्य सरकार के तीन अहम विभाग ग्रामीण कार्य, पेयजल एवं स्वच्छता और ग्रामीण विकास में पहले से हो चुके कार्यों का करीब 11,700 करोड़ रुपए का भुगतान दायित्व सामने आया है। इस बड़ी लायबिलिटी का भुगतान कैसे किया जाए, यह सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। भुगतान को लेकर सरकार मंथन में जुटी है। इस भुगतान दायित्व का खुलासा विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह के साथ हुई समीक्षा बैठक में विभागीय सचिवों ने किया। हाल ही में विकास आयुक्त ने योजना मद के तहत संचालित योजनाओं की विभागवार समीक्षा की थी। इसी दौरान सचिवों ने बताया कि पूर्व में कराए गए कार्यों का भुगतान करना अब विभागों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है।
ग्रामीण कार्य और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के. श्रीनिवासन ने बताया कि बजट और फंड की कमी के कारण चालू वित्तीय वर्ष में अब तक नए पुल-पुलिया और ग्रामीण सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। पिछले वर्षों में कराए गए कार्यों के भुगतान लंबित होने से यह स्थिति बनी है। जानिए…क्यों बनी ऐसी स्थिति और क्या होगा
बजट से कई गुना अधिक काम कराया- अधिकारियों ने बताया कि यह स्थिति इसलिए बनी, क्योंकि पिछले दो वर्षों में विभाग ने तय बजट से कई गुना अधिक काम करा लिया। सामान्य तौर पर उपलब्ध फंड से 25-30% अधिक काम कराया जा सकता है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा काम होने से अब भारी भुगतान दायित्व बन गया है। इसका सीधा असर यह पड़ा है कि वर्ष 2025–26 में नए पुल-पुलिया और ग्रामीण सड़कों के निर्माण की शुरुआत नहीं हो पा रही है। अनुपूरक बजट में नहीं मिली राशि- द्वितीय अनुपूरक बजट में ग्रामीण कार्य विभाग ने पुराने बिलों के भुगतान के लिए 3000 करोड़ रुपए की मांग की थी। हालांकि वित्त विभाग ने केवल 800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। इसमें 300 करोड़ रुपए नई सड़कों के लिए, 100 करोड़ रुपए नए पुल-पुलिया के लिए और शेष 400 करोड़ रुपए लायबिलिटी भुगतान के लिए रखे गए हैं। इसके बावजूद स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। किस विभाग में कितना बकाया खजाना खाली नहीं है, राजकोष और वित्तीय प्रबंधन की स्थिति बेहतर
बकाए का भुगतान क्यों नहीं हो रहा है?
राज्य का खजाना खाली नहीं है। कर्मचारी का वेतन बकाया नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपए के संसाधन उपलब्ध होने हैं। आय-व्यय दोनों समानांतर चल रहे हैं। वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य अपने आंतरिक संसाधनों की 85 से 90 प्रतिशत तक वसूली पूरी कर लेगा। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और ग्रांट-इन-एड के रूप में करीब 30 हजार करोड़ रुपए मिलने का भरोसा है।- राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड


