जेडीए 20 साल पुरानी वह गलती फिर दोहराने की तैयारी कर रहा है, जो आज तक नजीर बना हुआ है। अफसरों ने शहर के ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने और डवलपमेंट के लिए बन रहे कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) की स्टडी किए बिना ही अरण्य भवन से जगतपुरा तक एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी कर ली, जबकि इसकी सबसे ज्यादा जरूरत अरण्य भवन से जवाहर नगर टनल मार्ग तक है, जो शहर का मुख्य वैकल्पिक मार्ग भी है। जगतपुरा की ओर 100 फीट रोड है। यहां से करीब 50 हजार वाहन गुजरते हैं। जबकि टनल की ओर 50 फीट रोड है। परकोटे में मेला, शोभायात्रा, जुलूस, प्रदर्शन या दीपावली जैसे त्योहार पर आवाजाही का यही एकमात्र वैकल्पिक मार्ग है। रोज आगरा-दिल्ली जाने वाले सवा लाख वाहन गुजर रहे। जेडीए ने 2005 में भी यही गलती की थी, तब खासाकोठी फ्लाईओवर गवर्नमेंट हॉस्टल से कलेक्ट्रेट सर्किल तक बनाना था, जबकि सिंधी कैंप से रेलवे स्टेशन की तरफ बना दिया। इसी कारण अब भी एमआई रोड से कलेक्ट्रेट सर्किल तक दिनभर जाम की स्थिति रहती है। मास्टर प्लान-25 में 300 फीट सड़क, लेकिन 11 साल बाद भी प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं सीएमपी की स्टडी कर प्रोजेक्ट बनाते तो जेडीए अफसरों की सही सोच सामने आती
अफसरों ने सर्वे, सड़क की चौड़ाई व आबादी की गणना किए बिना ही एलिवेटेड घोषित किया है। यूडीएच सीएमपी तैयार करवा रहा है, जो जल्द ही सामने आ जाएगा। उसकी स्टडी कर प्रोजेक्ट बनाते तो सही सोच सामने आती। अभी हालात खासा कोठी की तरह हो सकते हैं।


