विदिशा में महीनों से ठप पड़े विदिशा नगर पालिका के विकास कार्य अब दोबारा शुरू होंगे। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद पार्षदों ने बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में शहर के रुके हुए कामों को फिर से गति देने पर चर्चा होगी। दरअसल विदिशा नगर पालिका में लंबे समय से अध्यक्ष और पार्षदों के बीच टकराव चल रहा था। भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कई बार कलेक्टर और संगठन के पदाधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक पेश कर दिया। हालांकि शासन की नई गाइडलाइन में “खाली कुर्सी–भरी कुर्सी” चुनाव की प्रक्रिया सामने आने के बाद अधिकांश पार्षद पीछे हट गए। उनका कहना था कि लंबी प्रक्रिया में जाने से बेहतर है कि अध्यक्ष के साथ मिलकर शहर के काम पूरे किए जाएं। वित्तीय प्रभार पर मचा नया विवाद
इस बीच विवाद तब और बढ़ गया जब अध्यक्ष का वित्तीय प्रभार उपाध्यक्ष को देने की तैयारी की गई। पार्षदों ने इसे एकतरफा निर्णय बताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कहा कि यह फैसला उनसे बिना परामर्श के लिया गया।इससे नगर पालिका में प्रशासनिक गतिविधियां लगभग ठप हो गईं और शहर के कई जरूरी विकास कार्य रुक गए। पार्षदों ने कलेक्टर से रखी वार्डों की समस्याएं
विकास कार्यों के ठप होने से शहर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। इस पर पार्षद गीतांजलि डोंगर सिंह, उनके पति संदीप डोंगर सिंह और पार्षद अशोक जाट ने कलेक्टर अंशुल गुप्ता से मुलाकात कर अपने-अपने वार्डों की समस्याएं रखीं। कलेक्टर ने इस दौरान आश्वासन दिया कि बहुमत वाले पार्षदों की एक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में भी आवश्यक विकास कार्यों के प्रस्ताव रखे जा सकेंगे। पार्षद बोले- अब नहीं रुकेंगे विकास कार्य
बैठक में सीएमओ भी मौजूद रहेंगे और जिला प्रशासन इन प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने में सहयोग करेगा। पार्षद संदीप डोंगर सिंह ने कहा कि नगर पालिका में मतभेद भले हों, लेकिन अब शहर के विकास कार्य नहीं रुकेंगे। प्रशासन के सहयोग से सभी वार्डों में जरूरी काम कराए जाएंगे।


